प्रधानमंत्री Narendra Modi के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम के भाषण में राजनीतिक उद्देश्य छिपा था और यह एक “बड़ा षड्यंत्र” था, जिसे विपक्ष ने बेनकाब किया।
“महिलाओं को भड़काने की कोशिश”
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाओं को भड़काने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, इससे पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने इस तरह राष्ट्र के नाम संबोधन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं लगाए।
“राष्ट्र के संबोधन में राजनीति नहीं होनी चाहिए”
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh, P. V. Narasimha Rao और Atal Bihari Vajpayee ने कभी भी राष्ट्र के संबोधन को राजनीतिक मंच नहीं बनाया। गहलोत के अनुसार, इस तरह के मंच का इस्तेमाल केवल राष्ट्रीय मुद्दों के लिए होना चाहिए।
“स्थायी सत्ता की सोच”
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां ऐसी हैं, जिससे वे लंबे समय तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश की संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है और एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए हो रहा है।
महिला आरक्षण पर भी उठाए सवाल
गहलोत ने कहा कि महिला आरक्षण का विचार कांग्रेस की पुरानी पहल रही है, जिसका समर्थन विपक्ष ने पहले भी किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने इस मुद्दे को भी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया।
“नीयत साफ होती तो सर्वदलीय चर्चा होती”
उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो पहले सभी दलों के साथ चर्चा की जाती। गहलोत के मुताबिक, बिना सहमति के इस तरह के कदम उठाना चुनावी रणनीति का हिस्सा है।