असम: असम में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है और कई जिलों में सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। हजारों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। राज्य सरकार ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही?
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक सिवसागर जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 3,48,555 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद चराइदेव में 1,88,404 और जोरहाट में 1,26,793 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा गोलाघाट, डिब्रूगढ़, होजाई, नगांव, बिस्वनाथ, धेमाजी, सोनितपुर, कामरूप (मेट्रो) और कार्बी आंगलोंग सहित कई जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ का पानी 37 राजस्व मंडलों के 856 गांवों तक पहुंच चुका है। कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रहा है।
खेती, पशुधन और लोगों को भारी नुकसान
बाढ़ ने इस बार किसानों और पशुपालकों को भी बड़ा झटका दिया है। राज्यभर में 56,606.777 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। पिछले 24 घंटों में ही 17,107 पशु और पोल्ट्री बाढ़ के पानी में बह गए। वहीं 3.34 लाख से अधिक पशु-पक्षी अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। खेतों में पानी भरने से किसानों की आजीविका पर संकट गहरा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चारे और पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान की भी कमी देखी जा रही है। प्रशासन प्रभावित किसानों और पशुपालकों को राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
राहत शिविरों में लाखों लोग, बचाव अभियान जारी
बाढ़ से विस्थापित लोगों के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर राहत व्यवस्था की है। अब तक 3.15 लाख से अधिक लोग राज्यभर में बनाए गए 363 राहत शिविरों और राहत वितरण केंद्रों में शरण लिए हुए हैं। इन शिविरों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और स्थानीय प्रशासन ने पिछले 24 घंटों में करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालांकि सिवसागर जिले में अभी भी एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने डेरगांव के एक राहत शिविर का दौरा कर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पड़ोसी राज्य नागालैंड में हुए बादल फटने की घटना के कारण कई जिलों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हुई। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। सरकार लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।
ब्रह्मपुत्र का बढ़ता जलस्तर बना बड़ी चुनौती
लगातार हो रही बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कई क्षेत्रों में नावों के जरिए लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। जब तक बारिश का सिलसिला नहीं थमता, तब तक हालात में सुधार की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।
असम में बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन की चिंता बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और बारिश की तीव्रता पर ही यह निर्भर करेगा कि हालात कब तक सामान्य हो पाएंगे।