गुवाहाटी: असम में आई प्राकृतिक आपदा और भीषण बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार तो हो रहा है, लेकिन मौतों का सिलसिल लगातार जारी है। मंगलवार को बाढ़ की वजह से 7 और लोगों की जान चली गई, जिसके बाद राज्य में कुल मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 75 हो गया है।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के बुलेटिन के अनुसार, भले ही जलस्तर कम होने से प्रभावितों की संख्या घटकर 7 जिलों के 3.32 लाख लोगों तक सीमित रह गई है, लेकिन 622 गांव अभी भी जलमग्न हैं और संकट पूरी तरह टला नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिया जायजा
इस संकट के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात कर अपर असम (ऊपरी असम) में बाढ़ और राहत कार्यों की समीक्षा की।सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने बताया कि गृह मंत्री ने जमीनी स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता जारी रखेगी। अमित शाह ने दोहराया कि केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां और संसाधन इस मुश्किल वक्त में असम की जनता की सेवा में तत्पर हैं।

45,000 हेक्टेयर से अधिक फसल जलमग्न
सरकारी बुलेटिन के मुताबिक, बाढ़ के कारण 45,341.98 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। इसके अलावा कई जिलों में घर, मवेशी शेड, स्कूल और आंगनबाडी केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचा है।तमाम मुश्किलों के बीच भारतीय सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं और नागरिक स्वयंसेवक लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव और जोरहाट में युद्धस्तर पर राहत कार्य
सबसे ज्यादा प्रभावित ऊपरी असम के जिलों—शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव और जोरहाट में स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। अधिकांश इलाकों से पानी उतर चुका है, हालांकि कुछ निचले क्षेत्र अभी भी जलमग्न हैं। सरकारी एजेंसियां चौबीसों घंटे काम कर रही हैं और प्रभावित इलाकों में बिजली तथा अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने किया विशेष राहत पैकेज का ऐलान
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रभावित परिवारों के लिए एक व्यापक राहत और पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत:
- मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि (Ex-gratia) दी जाएगी।
- क्षतिग्रस्त मकानों, मवेशियों, मत्स्य पालन और फसलों के नुकसान का आकलन 3 अगस्त से शुरू होगा, जिसके बाद पात्र लाभार्थियों को मुआवजा मिलेगा।
- छात्रों के लिए विशेष शैक्षणिक सहायता और प्रभावित परिवारों को नकद वित्तीय मदद दी जाएगी।