कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और खेल प्रशासन में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाई स्वपन बनर्जी उर्फ बाबुन के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। खेल संगठनों में बदलाव के बीच बाबुन ने न केवल कुछ पदों से इस्तीफा दिया है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भी खुलकर निशाना साधा है।
बॉक्सिंग और हैंडबॉल एसोसिएशन से दिया इस्तीफा
बीओए (BOA) का पत्र मिलने के बाद बाबुन ने पश्चिम बंगाल प्रोग्रेसिव बॉक्सिंग एंड हैंडबॉल एसोसिएशन से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल वह बीओए के अधीन केवल बंगाल स्टेट टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। खेल प्रशासन में हुए बदलाव के बाद उनके इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अरूप विश्वास और सुजीत बसु पर साधा निशाना
बाबुन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने पूर्व खेल मंत्री सुभाष चक्रवर्ती और वर्तमान तृणमूल नेता मदन मित्र के साथ काम किया है, लेकिन अरूप विश्वास के साथ कभी तालमेल नहीं बैठा। उन्होंने कहा, “अरूप विश्वास मुझे काम नहीं करने देते थे। हमारे बीच कभी अच्छी समझ नहीं बनी। सुजीत बसु ने झूठ बोलकर मुझसे हॉकी छीन ली। अब मैं निशीथ प्रमाणिक के साथ काम करना चाहता हूं।” उनके इस बयान को खेल संगठनों में बदलते समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
परिवार को लेकर भी छलका दर्द
बाबुन ने अपने पारिवारिक संबंधों को लेकर भी भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “लंबे समय से मुझे हाशिए पर रखा गया है। घर में मैं जैसे त्याज्य पुत्र बन गया हूं। केवल भाईफोटा और राखी के समय ही दीदी मुझे बुलाती थीं। मेरी पीड़ा कोई नहीं समझता।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है।
तृणमूल में बढ़ रही अंदरूनी असंतोष की चर्चा
इधर तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सोमवार को ऋतब्रत और संदीपन को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठक में कई विधायकों की अनुपस्थिति ने भी सवाल खड़े किए थे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ असंतुष्ट विधायक लगातार संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम तेज हो सकता है।
क्या नए राजनीतिक समीकरण की तैयारी?
खबर है कि निष्कासित विधायक ऋतब्रत और संदीपन विधानसभा में अलग रुख अपनाने को लेकर कदम उठा सकते हैं। हालांकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। ऋतब्रत और संदीपन के निष्कासन के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की संख्या 80 से घटकर 78 रह गई है। ऐसे में किसी भी संभावित राजनीतिक पुनर्गठन के लिए दो-तिहाई यानी 52 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। फिलहाल इसके लिए उन्हें 50 और विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।
नजरें आगे के घटनाक्रम पर
बाबुन के बयान, खेल संगठनों में बदलाव और तृणमूल के भीतर बढ़ती असहमति की चर्चाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और खेल प्रशासन में क्या बदलाव होते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।