अतीत में आम चुनाव से पहले केंद्र सरकारें अपने कर्मियों, सशस्त्रबल कर्मियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को लुभाने के लिए वेतन आयोगों के गठन या उनकी सिफ़ारिशों को लागू करने को असरदार औज़ार की तरह इस्तेमाल करती रही हैं.लेकिन मोदी सरकार ने संसदीय चुनावो के बाबजूद भी 8वे वेतन आयोग के गठन का प्रस्ताव नकार दिया हैं |
वित्तसचिव ने गुरुवार को कहा, "आठवां वेतन आयोग गठित करने के संबंध में कोई योजना नहीं है... फिलहाल ऐसा कुछ लंबित नहीं है
दरअसल, अतीत में आम चुनाव से पहले केंद्र सरकारें अपने कर्मियों, सशस्त्रबल कर्मियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को लुभाने के लिए वेतन आयोगों के गठन या उनकी सिफ़ारिशों को लागू करने को असरदार औज़ार की तरह इस्तेमाल करती रही हैं. वर्ष 2013 के सितंबर माह में, कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव तथा आम चुनाव 2014 से कुछ ही माह पहले, कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने 7वां वेतन आयोग गठित किया था.
वेतन आयोग की जगह पेंसन नीति में बदलाव से राहत पहुचाने की योजना
माना जा रहा है कि सरकार कुछ बदलाव कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर सकती है कि प्रत्येक कर्मचारी को उनके अंतिम वेतन का कम से कम 40 से 45 फ़ीसदी हिस्सा पेंशन के तौर पर हासिल हो.
आम चुनाव बेहद करीब हैं, सो, भले ही पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे कुछ भी हों, वित्त मंत्रालय पर 8वें वेतन आयोग की घोषणा तथा अधिसूचित करने के लिए राजनीतिक तौर पर दबाव बढ़ता जा रहा है. वैसे, रविवार, 3 दिसंबर को घोषित हुए पांच राज्यों के चुनाव परिणामों को मोटे तौर पर लोकसभा चुनाव 2024 का सेमीफाइनल माना जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए मैदान में होंगे.
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