मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक टकराव के बीच चीनी इतिहासकार जियांग शुएछिन की पुरानी भविष्यवाणियां फिर चर्चा में आ गई हैं। कई लोग उन्हें “चीन का नास्त्रेदमस” कहने लगे हैं क्योंकि उन्होंने 2024 में दिए गए एक लेक्चर में ऐसे संकेत दिए थे जो आज की परिस्थितियों से काफी मेल खाते दिखाई दे रहे हैं। उनका यह लेक्चर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और वैश्विक राजनीति के विश्लेषकों के बीच भी बहस का विषय बन गया है।
ट्रंप की सत्ता में वापसी की भविष्यवाणी
अपने 2024 के व्याख्यान में जियांग शुएछिन ने कहा था कि ट्रंप अमेरिकी राजनीति में फिर से सत्ता के केंद्र में लौट सकते हैं। उस समय इस भविष्यवाणी को कई लोगों ने सामान्य राजनीतिक विश्लेषण मानकर नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों के बाद यह दावा फिर से चर्चा में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राजनीति में ट्रंप की भूमिका वास्तव में वैश्विक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
अमेरिका-ईरान युद्ध की आशंका भी जताई थी
जियांग शुएछिन ने अपने लेक्चर में यह भी कहा था कि अमेरिका और Iran के बीच तनाव इस हद तक बढ़ सकता है कि वह खुले युद्ध में बदल जाए। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य टकराव, हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद उनकी यह भविष्यवाणी भी काफी हद तक सही साबित होती दिखाई दे रही है। इसी कारण उनका नाम फिर से वैश्विक मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर चर्चा में आ गया है।
लंबा युद्ध हुआ तो अमेरिका के लिए मुश्किल
एक इंटरव्यू में जियांग शुएछिन ने अपनी तीसरी और सबसे विवादित भविष्यवाणी दोहराई। उनका कहना है कि यदि United States और ईरान के बीच लंबा युद्ध चलता है, तो अमेरिका के लिए स्थिति बेहद कठिन हो सकती है और उसे रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार ईरान के पास क्षेत्रीय नेटवर्क और प्रॉक्सी समूहों का मजबूत आधार है, जो युद्ध को लंबा और जटिल बना सकता है।
प्रॉक्सी नेटवर्क से बढ़ सकता है ईरान का प्रभाव
इतिहासकार के मुताबिक ईरान का प्रभाव केवल उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में सक्रिय कई संगठन जैसे Hamas और Hezbollah ईरान के रणनीतिक प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं। उनका मानना है कि अगर युद्ध का दायरा बढ़ता है और अमेरिका जमीनी सेना भेजने का फैसला करता है, तो यह उसके लिए सबसे जोखिम भरी स्थिति बन सकती है।
वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान के बीच लंबा युद्ध होता है तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और विश्व अर्थव्यवस्था तक इसके गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे में जियांग शुएछिन की भविष्यवाणी को कई लोग केवल संयोग नहीं बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत मान रहे हैं।
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