नई दिल्ली - नई दिल्ली में केंद्र सरकार के साथ बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों से जुड़े कुछ मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मुख्य मांग पर स्पष्ट फैसला नहीं करती है, तो लगातार बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा और संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।
मुआवजा और कानूनी मामलों पर सकारात्मक संकेत
आशुतोष रांका ने बताया कि पिछली बैठक में मुआवजा और छात्रों से जुड़े कानूनी मामलों को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। उनके अनुसार इन मुद्दों पर एक "इन-प्रिंसिपल एग्रीमेंट" भी हुआ था। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा दौर की वार्ता में इन बिंदुओं पर औपचारिक सहमति भी सामने आएगी। हालांकि उन्होंने दोहराया कि संगठन की सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है।
"इस्तीफा नहीं तो बैठक का कोई मतलब नहीं"
रांका ने कहा कि यदि सरकार यह स्पष्ट कर दे कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, तो फिर इस तरह की बैठकों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में CJP अपने आंदोलन और आगे की रणनीति पर विचार करेगा। संगठन का कहना है कि जवाबदेही तय किए बिना छात्रों का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता।
NTA अधिकारियों की बर्खास्तगी पर भी उठाए सवाल
सरकार द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि इस फैसले की पूरी जानकारी और विवरण देखना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन अंतिम जवाबदेही शिक्षा मंत्री की बनती है क्योंकि परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े निर्णय उनके मंत्रालय के अधीन आते हैं।
शिक्षा मंत्री को बताया अंतिम जिम्मेदार
रांका ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों और NEET पेपर लीक के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री पर है। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष स्तर पर भी कार्रवाई जरूरी है।
सुधारों पर बातचीत जारी
CJP प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के साथ अन्य बड़े शिक्षा सुधारों पर भी चर्चा जारी है। उनका कहना है कि संगठन केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे की मांग नहीं कर रहा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक सुधार चाहता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और वार्ता दोनों जारी रहेंगे।
