नई दिल्ली- कांग्रेस पार्टी ने अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी है कि वे किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर न करें जो भारत के राष्ट्रीय हितों, किसानों और घरेलू उद्योगों के खिलाफ हो। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रस्तावित समझौता भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है और देश के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने “अच्छे मित्र” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की नीति छोड़नी चाहिए और भारत के किसानों तथा घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को किसी भी ऐसे व्यापार समझौते में नहीं जाना चाहिए, जिसमें देश को असमान शर्तों का सामना करना पड़े।
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर उठे सवाल
कांग्रेस के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक साझा बयान जारी किया गया था। इस दौरान कथित रूप से कुछ अहम शर्तों पर सहमति बनी थी, जिसे लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
कांग्रेस का दावा है कि उस समय सरकार पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव था, जिसके कारण यह बयान सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर टैक्स में कटौती और भारत द्वारा अमेरिकी कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ में कमी जैसी शर्तें शामिल थीं। इसके बदले भारत से बड़े पैमाने पर अमेरिकी उत्पादों की खरीद का भी उल्लेख किया गया था।
अमेरिका की व्यापार नीति और बदलता परिदृश्य
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ टैक्स नीतियों को अवैध घोषित कर दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार समीकरण बदल गए इसके बाद अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों पर अस्थायी टैरिफ लगाए जाने की भी बात सामने आई, जिससे वैश्विक व्यापार अनिश्चितता बढ़ी है। जयराम रमेश के अनुसार, अमेरिका अब कई देशों की व्यापार नीतियों की जांच कर रहा है और इसे दबाव की रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
कांग्रेस की चेतावनी और सरकार को संदेश
कांग्रेस का कहना है कि भारत को किसी भी जल्दबाजी में समझौता नहीं करना चाहिए। पार्टी ने सरकार से अपील की है कि वह किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू उत्पादन हितों को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय ले।
पार्टी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिया गया कोई भी फैसला लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।