नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह और गुटबाजी को शांत करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने शनिवार देर रात संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया पार्टी प्रभारी नियुक्त किया है। वह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह लेंगे। वहीं, इस फेरबदल के तहत भूपेश बघेल को असम राज्य का नया प्रभारी बनाया गया है।
पंजाब में गुटबाजी खत्म करना पायलट की पहली प्राथमिकता
राजस्थान में साल 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि सचिन पायलट को राज्य संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। लेकिन अब पंजाब की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी राजस्थान राजनीति में वापसी का इंतजार थोड़ा बढ़ गया है। पंजाब में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में गुटबाजी में उलझी पंजाब कांग्रेस में एकजुटता कायम करना पायलट के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
राजा वड़िंग और चन्नी गुट के बीच तनातनी के कारण हटे बघेल
फरवरी 2025 में पंजाब के प्रभारी बने भूपेश बघेल पर गुटबाजी रोकने में नाकाम रहने और निष्पक्ष न रहने के आरोप लग रहे थे। राज्य प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बनाए रखने के फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला का गुट विरोध कर रहा था। बघेल पर राजा वड़िंग का पक्ष लेने के आरोप लगे, जिसके बाद राज्य के कुछ हिस्सों में उनके खिलाफ पोस्टर तक लग गए थे।
पायलट की नियुक्ति का स्वागत, क्या थमेगी बयानबाजी?
सचिन पायलट की नियुक्ति की घोषणा होते ही राज्य के सभी विरोधी गुटों ने फैसले का स्वागत किया है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आलाकमान के फैसले का आभार व्यक्त किया। हालांकि, असली सवाल यह है कि क्या इस बदलाव के बाद चन्नी और बाजवा गुट राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद से हटाने की अपनी मांग को छोड़ेंगे या नहीं।
राहुल गांधी की बस यात्रा से होगी सचिन पायलट की पहली परीक्षा
आने वाले दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूरे पंजाब में वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बस यात्रा (Bus Tour) करने वाले हैं। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद यह बस यात्रा उनकी कूटनीतिक क्षमता की पहली वास्तविक परीक्षा होगी। राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार और भाजपा-शिरोमणि अकाली दल के संभावित राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस को मजबूत करना पायलट के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।