नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून का असर लगातार तेज बना हुआ है। राजधानी दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर और उत्तरप्रदेश तक बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। दिल्ली में अगस्त के शुरुआती दिनों में ही बारिश ने पिछले डेढ़ दशक का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। वहीं जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश और भूस्खलन की आशंका के चलते अमरनाथ यात्रा को एक बार फिर अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
उत्तरप्रदेश में भी लंबे समय से जारी बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा के बढ़ते पानी का असर घाटों और आसपास के मंदिरों तक पहुंच गया है। दूसरी ओर आगरा में सड़क का एक हिस्सा धंसने से बड़ा गड्ढा बन गया, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
दिल्ली में 15 साल बाद बारिश का रिकॉर्ड
राष्ट्रीय राजधानी में मानसून इस बार लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। अगस्त के पहले सप्ताह में दिल्ली में अब तक 127 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम के आंकड़ों के मुताबिक यह 2011 के बाद अगस्त के शुरुआती दिनों में दर्ज हुई सबसे अधिक बारिश बताई जा रही है।लगातार बारिश के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।बारिश के कारण राजधानी के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बनी है। निचले इलाकों में पानी जमा होने से यातायात और सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
देवली में पार्किंग की दीवार गिरी, 8 गाड़ियां क्षतिग्रस्त
दिल्ली के देवली इलाके में शनिवार को तेज बारिश के दौरान एक पार्किंग की दीवार अचानक गिर गई। दीवार का मलबा पास खड़ी गाड़ियों पर जा गिरा, जिससे आठ वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी बड़े जनहानि की सूचना नहीं है। स्थानीय स्तर पर मलबा हटाने और स्थिति को सामान्य करने का काम किया गया।लगातार हो रही बारिश के कारण कमजोर दीवारों, जलभराव और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में बारिश और लैंडस्लाइड का खतरा
जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम के कारण शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा फिर रोक दी गई। लगातार बारिश के साथ कई इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।मौसम विभाग ने जम्मू क्षेत्र में 11 अगस्त तक तेज बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड की आशंका जताई है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने पर सड़कें बाधित होने और रास्तों पर मलबा आने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिस्थितियों के अनुसार यात्रा संचालन का फैसला कर रहा है।
उत्तरप्रदेश में 25 दिन से बारिश का सिलसिला
उत्तरप्रदेश में भी बारिश का असर लगातार देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में करीब 25 दिनों से रुक-रुककर भारी बारिश जारी है। इसके चलते नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ी हुई है।वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण कई घाट पानी में डूब गए हैं। करीब 84 घाटों का आपसी संपर्क प्रभावित हुआ है। नदी का पानी आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने से कई छोटे मंदिर भी प्रभावित हुए हैं।
काशी में घाटों पर बढ़ा पानी
गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण वाराणसी के घाटों का स्वरूप बदल गया है। सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गुलजार रहने वाले कई घाटों पर पानी पहुंच गया है।बताया जा रहा है कि 50 से 60 छोटे मंदिरों में भी पानी प्रवेश कर चुका है। प्रशासन नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।घाटों के डूबने से धार्मिक गतिविधियों और स्थानीय आवागमन पर भी असर पड़ा है।
आगरा में सड़क धंसी, 20 फीट गहरा गड्ढा बना
बारिश का असर आगरा में भी देखने को मिला, जहां सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क धंसने के बाद वहां करीब 20 फीट गहरा गड्ढा बन गया।घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई। सड़क धंसने की वजह लगातार बारिश के कारण जमीन के भीतर पानी का दबाव और मिट्टी के कमजोर होने से जुड़ी हो सकती है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही होगी।
कई राज्यों में मौसम का असर
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तरप्रदेश के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी मानसून सक्रिय है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण भूस्खलन और मैदानी इलाकों में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए प्रशासनिक एजेंसियां संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा पहाड़ी रास्तों पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।