पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध समुद्री पर्यटन स्थल मंदारमणि से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। झारखंड के धनबाद से परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आए 7 साल के मासूम बच्चे के साथ समुद्र में बड़ा हादसा हो गया। समुद्र स्नान के दौरान बच्चा अचानक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। घायल बच्चे की पहचान रियांश कुमार (7) के रूप में हुई है, जो अपने माता-पिता के साथ समुद्र में खेल रहा था।
समुद्र की लहरों के बीच अचानक हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, धनबाद निवासी रवि कुमार अपने परिवार के साथ गुरुवार को मंदारमणि पहुंचे थे। परिवार यहां स्थित वर्षा होटल में ठहरा हुआ था। होटल में चेक-इन करने के बाद दोपहर के समय सभी समुद्र तट पर घूमने और स्नान करने पहुंचे। बताया जा रहा है कि रियांश अपने माता-पिता के साथ समुद्र के पानी में खेल रहा था, तभी अचानक वह जोर-जोर से चीखने लगा। परिजनों और आसपास मौजूद लोगों ने देखा कि बच्चा बुरी तरह घायल हो चुका है। आशंका जताई जा रही है कि वह तेज लहरों की चपेट में आया या फिर समुद्र के भीतर किसी अज्ञात वस्तु से टकरा गया। स्थानीय लोगों और होटल स्टाफ की मदद से बच्चे को तुरंत समुद्र से बाहर निकाला गया।
कांथी के निजी नर्सिंग होम में भर्ती, हालत पर नजर
बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद उसे तुरंत कांथी के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को गंभीर चोटें आई हैं और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। रियांश के पिता रवि कुमार और परिवार के अन्य सदस्य अस्पताल परिसर में मौजूद हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगले 24 घंटे बच्चे की सेहत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
पर्यटकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद समुद्री पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से अक्सर पर्यटकों को गहरे पानी में न जाने और बच्चों पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जाती है। जानकारों का कहना है कि दोपहर के समय समुद्र में ज्वार आने के कारण लहरें काफी तेज और खतरनाक हो सकती हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक उत्साह में सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर देते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासन की अपील
मंदारमणि प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि समुद्र में उतरते समय सावधानी बरतें, बच्चों को अकेला न छोड़ें और चेतावनी संकेतों व सुरक्षा घेरे का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।