नई दिल्ली. लगातार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब पेट्रोल पंपों पर भी दिखाई देने लगा है। देश के कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को एक बार में सीमित मात्रा में डीजल दिया जा रहा है। कई जगहों पर बिक्री की रोजाना सीमा भी तय की गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कुछ जियो-बीपी पंपों को एक ग्राहक को अधिकतम 50 लीटर डीजल देने के निर्देश मिले हैं। कुछ पंपों पर एक दिन में कुल 6000 लीटर तक डीजल बेचने की सीमा भी बताई गई है। नायरा एनर्जी के कुछ पंपों पर एक ग्राहक को एक बार में 70 से 200 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है। यह नियम हर पेट्रोल पंप पर लागू नहीं है।
सरकारी पंपों पर सामान्य बिक्री
डीजल लिमिट अभी केवल कुछ निजी पंपों पर है। फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ऐसी किसी सीमा की बात सामने नहीं आई है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कहा है कि उनके पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री सामान्य रूप से जारी है। देश में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं और इनमें करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी इन तीन सरकारी तेल कंपनियों की है। ऐसे में कुछ निजी पंपों पर बिक्री सीमित होने के बावजूद इसका असर अभी पूरे देश में डीजल की कमी के रूप में नहीं देखा जा रहा है। आपूर्ति व्यवस्था सामान्य बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। निजी पंप संचालक अपनी आपूर्ति और मार्जिन को ध्यान में रखते हुए बिक्री सीमित कर सकते हैं। हालांकि सरकारी कंपनियां बड़े नेटवर्क और भंडारण क्षमता के कारण सामान्य बिक्री बनाए रखे हुए हैं। अभी इसे देशव्यापी संकट नहीं माना जा रहा है। बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। उपभोक्ताओं को सरकारी पंपों पर निर्भर रहने की सलाह दी जा सकती है।
ट्रक चालकों पर संभावित असर
डीजल की बिक्री सीमित होने का असर खास तौर पर लंबी दूरी तक चलने वाले ट्रकों पर पड़ सकता है। ट्रक चालक कई बार सफर के दौरान बड़ी मात्रा में डीजल भरवाते हैं। दूरदराज के इलाकों में पेट्रोल पंप भी कम होते हैं। ऐसे में अगर किसी पंप पर तय मात्रा से ज्यादा डीजल नहीं मिलता है तो ट्रक चालकों को रास्ते में अतिरिक्त ईंधन भरवाने के लिए रुकना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय और लागत बढ़ सकती है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर इसका असर नजर आने की संभावना है।
आगे की निगरानी और स्थिति
अभी यह सीमा केवल कुछ निजी पंपों तक सीमित है और सरकारी नेटवर्क पर सामान्य बिक्री जारी है। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने पर स्थिति सामान्य हो सकती है। उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्टर्स को सतर्क रहने की जरूरत है। तेल कंपनियां आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही हैं। बाजार की निगरानी जारी रहेगी ताकि किसी बड़े संकट से बचा जा सके। फिलहाल देशभर में डीजल की उपलब्धता बनी हुई है।