नई दिल्ली. देश में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिश्रण को बढ़ाने की नीति के बीच पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताओं ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसी को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय अब ऐसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनसे पुराने वाहनों के लिए कम इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार प्रीमियम पेट्रोल को 10% इथेनॉल मिश्रण यानी E10 के साथ बेचने की संभावना पर चर्चा कर रही है। इसका उद्देश्य अलग से नया ईंधन ढांचा तैयार किए बिना उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है। हालांकि, अभी यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रीमियम पेट्रोल बन सकता है E10 का विकल्प
प्रस्ताव के तहत 95-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल को E10 के रूप में उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के पास ऐसे प्रीमियम ईंधन पहले से मौजूद हैं, जिनमें इंडियन ऑयल का XP95, भारत पेट्रोलियम का SPEED और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power95 शामिल हैं। यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो इन्हीं मौजूदा ईंधन ढांचे का इस्तेमाल पुराने वाहनों के लिए कम इथेनॉल वाला विकल्प देने में किया जा सकता है। इससे सरकार को अलग पंप, भंडारण व्यवस्था या वितरण प्रणाली विकसित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उपभोक्ताओं को भी अपेक्षाकृत आसान विकल्प मिल सकता है।
पुराने वाहनों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल का मिश्रण होता है और वर्तमान में देशभर के पेट्रोल पंपों पर यह मानक ईंधन मिश्रण बन चुका है। हालांकि, पुराने वाहनों के मालिकों के एक वर्ग में इसके इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। खासतौर पर वाहन की ईंधन दक्षता, इंजन के प्रदर्शन और लंबे समय में इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसी पृष्ठभूमि में पुराने वाहनों के लिए E10 जैसे विकल्प की मांग तेज हुई है। सरकार का ताजा विचार इसी चिंता को दूर करने और उन उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में देखा जा रहा है, जिनके वाहन नए इथेनॉल मिश्रण के अनुरूप पूरी तरह तैयार नहीं हो सकते।
तेल कंपनियों के साथ चल रही बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय इस प्रस्ताव को लेकर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ चर्चा कर रहा है। मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया गया है कि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और सरकार ने किसी विकल्प को अंतिम रूप नहीं दिया है। मंत्रालय के सामने चुनौती यह है कि E10 की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ मौजूदा ईंधन वितरण व्यवस्था को भी सरल रखा जाए। प्रीमियम 95-ऑक्टेन पेट्रोल को इसके लिए संभावित विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इसकी बिक्री के लिए पहले से बुनियादी ढांचा मौजूद है।
उपभोक्ताओं की चिंता दूर करने की कोशिश
सरकार के इस संभावित कदम का सबसे बड़ा उद्देश्य E20 को लेकर उपभोक्ताओं के बीच बनी आशंकाओं को कम करना माना जा रहा है। यदि प्रीमियम श्रेणी में E10 उपलब्ध होता है तो पुराने वाहनों के मालिकों के पास कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प होगा, हालांकि इसके लिए उन्हें सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार के सामने यह संतुलन भी महत्वपूर्ण होगा कि उपभोक्ताओं को विकल्प देने के साथ ईंधन की कीमत और उपलब्धता कितनी व्यावहारिक रखी जाए। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो E10 प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री देशभर में होगी या इसे चुनिंदा क्षेत्रों और पेट्रोल पंपों से शुरू किया जाएगा।
इथेनॉल नीति और वाहन मालिकों के बीच संतुलन
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। दूसरी ओर, वाहन उद्योग में अलग-अलग पीढ़ी के वाहनों की तकनीकी क्षमता एक जैसी नहीं है, जिसके कारण E20 को लेकर पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे में E10 को प्रीमियम ईंधन के रूप में वापस लाने का विकल्प सरकार के लिए दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास हो सकता है। हालांकि, अंतिम तस्वीर तभी साफ होगी जब पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियां तकनीकी, आर्थिक तथा आपूर्ति संबंधी पहलुओं पर विचार पूरा कर किसी औपचारिक निर्णय तक पहुंचें।