नई दिल्ली. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सिर्फ चरम मौसमी घटनाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि इससे खाद्य उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार सूखा रिकॉर्ड गर्मी और बहुत ज्यादा बारिश की घटनाओं ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कॉफी मांस सब्जियों आलू और समुद्री शैवाल जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की है। इसमें अल नीनो की भूमिका अहम है। मौसम में हो रहे बदलाव स्थानीय स्तर पर होने वाली अस्थायी खाद्य कमी को लंबे समय तक ऊंची बनी रहने वाली कीमतों की समस्या में बदल रहे हैं।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
जीरो कार्बन एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक मौसम में हो रहे ये बदलाव स्थानीय स्तर पर होने वाली अस्थायी खाद्य कमी को लंबे समय तक ऊंची बनी रहने वाली कीमतों की समस्या में बदल रहे हैं। रिपोर्ट के साथ कीमतों में बढ़ोतरी का मानचित्र जारी किया गया है। इसमें 16 मामले उस अकादमिक अध्ययन से लिए गए हैं जिस पर इसकी पद्धति आधारित है। 2024 के बाद खाद्य आपूर्ति को प्रभावित करने वाले 12 नए मामलों को इसमें शामिल किया गया है। मानचित्र में यह देखा गया है कि संबंधित अवधि में मौसम सामान्य से कितना अलग था और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वास्तव में कितनी बढ़ोतरी हुई।
भारत समेत दुनिया में महंगाई
भारत में हरी सब्जियों और फलियों की कीमत कई गुना बढ़ गई। जुलाई की तुलना में टमाटर 31 फीसदी महंगा हो गया है। वहीं ब्राजील में कॉफी का उत्पादन प्रभावित हुआ है। अमेरिका के ग्रेट प्लेन क्षेत्र में गंभीर सूखे की स्थिति बन गई है। इधर ब्रिटेन में बारिश ने उत्पात मचाया है। खेतों में पानी भरने से पशुपालन पर बुरा असर पड़ा है। इन घटनाओं से आलू टमाटर जैसी सब्जियों के साथ-साथ मांस और कॉफी जैसी वस्तुओं की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में मौसमी विकृतियों ने आपूर्ति को प्रभावित किया है।
सुपर अल नीनो की स्थिति
इन मामलों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय बड़े बदलाव के हिस्से के तौर पर देखना होगा। कई तरह के जलवायु झटके एक साथ बढ़ रहे हैं और इनका असर जल्दी खराब होने वाले और पोषक खाद्य पदार्थों पर पड़ रहा है। सुपर अल नीनो की स्थिति व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के साथ मिलकर खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में मौजूद सुरक्षा-परतों को कमजोर कर रही है। अल नीनो के प्रभाव से मौसम चक्र में बदलाव आ रहा है जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है।
आपूर्ति श्रृंखला पर असर
जलवायु संबंधी घटनाओं ने खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को कमजोर कर दिया है। सूखा गर्मी और अत्यधिक बारिश जैसी घटनाएं उत्पादन को सीधे प्रभावित कर रही हैं। स्थानीय कमी अब वैश्विक स्तर पर कीमतों में वृद्धि का रूप ले रही है। जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों पर इसका असर अधिक दिख रहा है। आपूर्ति में व्यवधान से उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि ये प्रभाव अस्थायी नहीं बल्कि लंबे समय तक रहने वाले हो सकते हैं।
लंबे समय तक ऊंची कीमतों का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार मौसमी बदलाव स्थानीय खाद्य कमी को लंबे समय तक ऊंची कीमतों की समस्या में बदल रहे हैं। सुपर अल नीनो जैसी स्थितियां आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के साथ मिलकर स्थिति को और जटिल बना रही हैं। आलू टमाटर कॉफी मांस जैसी वस्तुएं महंगी हो रही हैं जिसका असर आम लोगों के बजट पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के इन प्रभावों को गंभीरता से लेने और अनुकूलन उपाय अपनाने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियां बनानी होंगी।