बढ़ते तापमान का अर्थ केवल पृथ्वी का गर्म होना नहीं है। इसका सीधा प्रभाव अब सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य के हालात पर पड़ रहा है। पृथ्वी के बढ़ते तापमान के लिए इंसानी गतिविधियां तो जरूरत हैं, लेकिन टेक्नॉलॉजी भी इसका बड़ा कारण है। बढ़ती जनसंख्या के लिए घर मुहैया कराने के लिए जंगलों की कटाई, अधिक से अधिक उपकरणों का प्रयोग, इसका परिणाम बढ़ते तापमान और पर्यावरण में असंतुलन के रूप में सामने आ रहा है। इसके भयावह परिणामों की चेतावनी पिछले कई दशकों से वैज्ञानिक देते आ रहे हैं।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
फसलों के खत्म होने के साथ-साथ वस्तुओं के उत्पादन और निर्माण पर भी प्रभाव पड़ रहा है। प्रकृति के लगातार प्रभावित होने से खाद्य उद्योगों पर भी उसका गंभीर असर होने लगा है। लोगों की खाने की जरूरतों को पूरा करना अब एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
ठप न हो जाए बिजली व्यवस्था
यदि समुद्र का स्तर बढेगा तो बाढ़ की समस्या भी बढ़ती जाएगी और इसका प्रभाव हमारी पूरी बिजली व्यवस्था पर पड़ेगा। आंधी, तूफान और तेज बारिश की वजह से पूरा ग्रिड उखड़ सकता है और इससे हमारी पूरी जीवनशैली तहस-नहस हो सकती है क्योंकि बिजली से ही हमारे कई कार्य संचालित होते हैं।
कई देश पानी में समा जाएंगे
समुद्र का स्तर बढ़ने से कई देशों के इसके अंदर समा जाने की आशंका बढ़ती जा रही है। जिस तरह से ग्रीनलैंड जैसे देश का अस्तित्व तेजी से खत्म होता जा रहा है, उससे आने वाले समय में सुंदर शहर, देश और यहां तक कि महादेश भी समुद्र में समाकर इतिहास बन जाएंगे।
कैसे रोकें ग्लोबल वार्मिंग
ग्लोबल वार्मिंग रोकने के छोटे-छोटे प्रयास ला सकते हैं बड़ा परिवर्तन। इसे रोकना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं, लेकिन छोटे-छोटे प्रयास इसकी गति को कम जरूर कर सकते हैं। हम चाहे घर पर हों या दफ्तर में हमारी हर गतिविधि पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर होनी चाहिए।
writer BY - DILEEP PAL
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