सोने की कीमतों ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की थी, लेकिन 2026 की शुरुआत ने इस रफ्तार को अचानक थाम दिया। भारतीय बाजार में सोने का व्यापार करने वाले मंच MCX पर जनवरी 2026 में 10 ग्राम सोने का मूल्य जहां ₹1,80,779 तक पहुंच गया था, वहीं फरवरी 2026 के अंत तक इसमें भारी गिरावट देखी गई। कीमतें फिसलकर ₹1,56,200 पर पहुंच गईं, जो अपने उच्च स्तर से लगभग 13.5% की गिरावट का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति कुछ अलग नहीं रही। वैश्विक सोना व्यापार मंच COMEX पर भी सोना $5,626.80 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर $5,046.30 पर आ गया, जिससे यह लगभग 10.5% टूट चुका है। इतनी बड़ी गिरावट ने गोल्ड निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
रूस की नीति में बदलाव का वैश्विक असर
वैश्विक सोना बाजार में हालिया उथल-पुथल का मुख्य कारण रूस के रुख में संभावित बदलाव बताया जा रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, रूस अब दोबारा अमेरिकी डॉलर में व्यापारिक भुगतान शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह कदम उस समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में डॉलर पर निर्भरता घटाने की मुहिम चल रही थी। अगर रूस डॉलर को फिर से प्राथमिकता देता है, तो अन्य कई देशों की आर्थिक नीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
डी-डॉलराइजेशन को लग सकता है बड़ा झटका
BRICS समूह की ओर से पिछले कुछ वर्षों में डॉलर की पकड़ को कमजोर करने की कोशिशें जारी थीं। ऐसे में रूस की दिशा बदलने से इस अभियान को बड़ा धक्का लग सकता है। भारत और चीन समेत कई देशों के सेंट्रल बैंक हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर सोने की खरीद करते रहे, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें लगातार ऊपर चढ़ती रहीं। लेकिन अगर केंद्रीय बैंक यह मान लें कि डॉलर दोबारा वैश्विक व्यापार का मुख्य साधन बन सकता है, तो वे सोने की आक्रामक खरीद को धीमा कर सकते हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ेगा।
निवेशकों की मुनाफावसूली से बढ़ रहा दबाव
सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के बाद अब निवेशक भी मुनाफावसूली की ओर बढ़ रहे हैं। कीमतें ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अक्सर बाजार में सुधार आता है, लेकिन इस बार यह सुधार वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक निर्णयों से जुड़ गया है। फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित कटौती टलने के कयास डॉलर को मजबूत बनाए रखेंगे, जिससे सोने के दामों पर और दबाव पड़ सकता है।
क्या 2027 तक सोना ₹1 लाख के नीचे जा सकता है?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा वैश्विक संकेत इसी तरह बने रहे, तो 2027 तक सोने की कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट देखी जा सकती है। डॉलर की मजबूती, सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की खरीद में कमी, और बड़ी मात्रा में मुनाफावसूली की संभावना सोने के भविष्य को चुनौतीपूर्ण बना रही है। हालांकि यह गिरावट धीरे-धीरे होगी और कई आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, लेकिन यह अनुमान बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर चुका है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बाजार की परिस्थितियों पर नजदीकी नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि सोने की कीमतों की चाल आने वाले महीनों और वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजर सकती है।
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