नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी राजस्थान के बड़े हिस्से में हवाई गतिविधियों के लिए 21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक का समय निर्धारित किया है। इसके लिए जारी NOTAM के तहत जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर क्षेत्र के ऊपर हवाई क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस आरक्षित क्षेत्र की ऊंचाई करीब 40,000 फीट तक जाती है और इसके एक हिस्से की दूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 20 किलोमीटर तक बताई गई है। नाल-बीकानेर के आसपास का एक अन्य क्षेत्र भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इतने लंबे समय के लिए और सीमा के इतने करीब हवाई क्षेत्र आरक्षित किए जाने ने स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान खींचा है।
पाकिस्तान ने बढ़ाई निगरानी, आपात बैठक की खबर
भारतीय वायुसेना के इस कदम के बाद पाकिस्तान में उच्चस्तरीय समीक्षा और निगरानी बढ़ाए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने भारतीय अधिसूचना की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई और सीमा के आसपास सुरक्षा तंत्र को अधिक सतर्क किया गया। पाकिस्तानी पक्ष की ओर से इस घटनाक्रम पर नजर रखने की बात सामने आई है, हालांकि इसे भारत की ओर से किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई का संकेत मानना अभी उचित नहीं होगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी सार्वजनिक रूप से घबराने जैसी स्थिति नहीं होने का संदेश देने की कोशिश की है। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में देखना अधिक उचित होगा, न कि केवल एक युद्धाभ्यास को संभावित हमले से जोड़कर।
NOTAM आखिर क्यों जारी किया जाता है?
NOTAM यानी हवाई अभियानों से संबंधित आधिकारिक सूचना, विमानन व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली एक मानक अधिसूचना है। इसका उद्देश्य पायलटों और नागरिक विमानन तंत्र को ऐसे हवाई क्षेत्रों के बारे में पहले से जानकारी देना होता है, जहां किसी निश्चित अवधि में सामान्य उड़ान गतिविधियों पर प्रतिबंध या विशेष सावधानी लागू हो सकती है। सैन्य अभ्यास, हथियारों के परीक्षण और अन्य हवाई गतिविधियों के दौरान इस तरह की सूचना जारी करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए केवल NOTAM जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई होने वाली है। मौजूदा मामले में इसकी अहमियत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि आरक्षित क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान में है और उसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के अपेक्षाकृत करीब बताया गया है।
एक के बाद एक दो बड़े हवाई अभ्यास से बढ़ेगी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम को केवल 21 सितंबर से शुरू होने वाले 17 दिवसीय आरक्षित हवाई क्षेत्र तक सीमित करके देखना अधूरा होगा। राजस्थान में इसी अवधि के आसपास भारतीय वायुसेना के दो बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अभ्यास भी होने जा रहे हैं। भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास सितंबर में जोधपुर में प्रस्तावित है, जिसमें जापानी वायु आत्मरक्षा बल के एफ-2ए लड़ाकू विमानों की भारत में पहली भागीदारी खास आकर्षण होगी। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी इस वर्ष होने वाले इस अभ्यास में पहली बार जापानी लड़ाकू विमानों के भारत आने की पुष्टि की है। इससे दोनों देशों के बीच हवाई सुरक्षा सहयोग और संयुक्त अभियान क्षमता बढ़ाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
‘तरंग शक्ति’ से अंतरराष्ट्रीय रंग लेगा राजस्थान का आसमान
भारत-जापान अभ्यास के बाद जोधपुर में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ भी आयोजित होने वाला है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार इसका आयोजन 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक प्रस्तावित है और इसमें कई देशों की वायु सेनाओं के शामिल होने की संभावना है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रीस, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों के विमानों की भागीदारी की रिपोर्ट है, जबकि 30 से अधिक देशों के पर्यवेक्षक के रूप में जुड़ने की बात भी सामने आई है। अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमानों की संभावित भागीदारी को लेकर भी चर्चा है, हालांकि ऐसी तैनाती को अंतिम रूप दिए जाने की स्थिति अलग हो सकती है। इस तरह सितंबर के दूसरे हिस्से से अक्टूबर के शुरुआती दिनों तक पश्चिमी राजस्थान का आसमान भारतीय और विदेशी लड़ाकू विमानों की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
पाकिस्तान के लिए चिंता की असली वजह क्या है?
पाकिस्तान की चिंता का एक कारण केवल हवाई क्षेत्र का आरक्षण नहीं, बल्कि इसका स्थान, अवधि और आसपास होने वाली सैन्य गतिविधियों का एक साथ आना है। राजस्थान का पश्चिमी हिस्सा पाकिस्तान की सीमा के निकट है और यहां होने वाले बड़े हवाई अभ्यास स्वाभाविक रूप से पड़ोसी देश की निगरानी व्यवस्था के दायरे में आते हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष के सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के बीच हवाई और सीमा गतिविधियों को लेकर संवेदनशीलता पहले से अधिक है। ऐसे वातावरण में लड़ाकू विमानों के लंबे अभ्यास, विदेशी वायु सेनाओं की भागीदारी और सीमा के करीब आरक्षित हवाई क्षेत्र पाकिस्तान के लिए अतिरिक्त सतर्कता का कारण बन सकते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई नया सैन्य अभियान घोषित किया है; फिलहाल उपलब्ध जानकारी इसे निर्धारित सैन्य प्रशिक्षण और परिचालन तैयारी से जोड़ती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सैन्य तैयारी?
भारतीय वायुसेना के लिए इस तरह के अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं होते, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों जैसी चुनौतियों में पायलटों, विमानों और जमीनी तंत्र के बीच तालमेल परखने का अवसर भी देते हैं। पश्चिमी राजस्थान का भौगोलिक और सामरिक वातावरण वायु अभियानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां रेगिस्तानी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सीमा की निकटता अभ्यास को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाती है। भारत-जापान अभ्यास से द्विपक्षीय परिचालन तालमेल मजबूत होगा, जबकि ‘तरंग शक्ति’ जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास से अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त अभियान क्षमता और परस्पर समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। ऐसे अभ्यासों में विभिन्न विमानों, रणनीतियों और संचार प्रणालियों के साथ काम करने का अनुभव भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारी को व्यापक बनाता है। यही वजह है कि सितंबर का यह दौर भारतीय वायुसेना के लिए प्रशिक्षण और सामरिक तैयारी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीमा के पास गरजेंगे लड़ाकू विमान, लेकिन संदेश साफ है
राजस्थान में प्रस्तावित गतिविधियों ने निश्चित रूप से भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास सैन्य हलचल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक का NOTAM, उसके साथ होने वाले हवाई अभ्यास और उससे पहले भारत-जापान की गतिविधियां मिलकर पश्चिमी क्षेत्र में लंबे समय तक वायुसेना की सक्रियता का संकेत देती हैं। पाकिस्तान द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने और आपात समीक्षा किए जाने की खबर इसी संवेदनशील माहौल का हिस्सा है। लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे तत्काल युद्ध की आहट बताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल भारत का घोषित और रिपोर्ट किया गया उद्देश्य सैन्य अभ्यास, परिचालन क्षमता की जांच तथा मित्र देशों के साथ हवाई सहयोग को मजबूत करना है। हां, इतना जरूर है कि इन गतिविधियों के चलते आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान की नजर पश्चिमी राजस्थान के आसमान पर बेहद करीब से टिकी रहने वाली है।