अंताल्या. तुर्किये के अंताल्या में 9 से 21 नवंबर तक होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP-31 से पहले भारत ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक प्रयास जरूरी हैं, लेकिन हर देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों, संप्रभुता और गरीबी उन्मूलन से जुड़ी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भारत किसी भी साझा लक्ष्य पर सहमति बनाने से पहले उसके राष्ट्रीय प्रभावों का आकलन करेगा।
2035 तक विद्युतीकरण के लक्ष्य पर फैसला बाकी
तुर्किये ने जून में प्रस्ताव रखा था कि दुनिया 2035 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली से पूरा करने का लक्ष्य हासिल करे, ताकि उत्सर्जन में कमी लाई जा सके। भारत ने फिलहाल इस प्रस्ताव का समर्थन करने पर निर्णय नहीं लिया है। यादव ने कहा कि किसी भी वैश्विक लक्ष्य को सभी देशों की अलग-अलग परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए। भारत की ऊर्जा जरूरतें, विकास की चुनौतियां और बड़ी आबादी तक बिजली की पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों पर जोर
भारत COP-31 की वार्ताओं में समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों तथा संबंधित क्षमताओं के सिद्धांतों के पालन की मांग करेगा। यादव के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन से निपटने में सभी देशों की भूमिका है, लेकिन उनकी ऐतिहासिक जिम्मेदारियां, आर्थिक क्षमता और विकास की स्थिति एक जैसी नहीं हैं। इसलिए विकसित और विकासशील देशों पर समान दायित्व थोपना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भी लगातार इन सिद्धांतों को भारत की जलवायु नीति की बुनियाद बताते रहे हैं।
जीवाश्म ईंधन का तत्काल इस्तेमाल बंद करना व्यावहारिक नहीं
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीवाश्म ईंधन का तत्काल इस्तेमाल बंद करना व्यावहारिक विकल्प नहीं है। यादव ने कहा कि आम लोगों को सुलभ और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। विकासशील देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास की जरूरतों को नजरअंदाज करके जलवायु लक्ष्य तय नहीं किए जा सकते। भारत का रुख है कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव जरूरी है, लेकिन इसकी गति और स्वरूप राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप तय होना चाहिए।
स्वैच्छिक पहल और औपचारिक वार्ताओं को अलग रखने की मांग
पर्यावरण मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि अध्यक्षता कार्यसूची के तहत शुरू की जाने वाली स्वैच्छिक पहलों को औपचारिक जलवायु वार्ताओं से अलग रखा जाना चाहिए। साथ ही, समान वैश्विक लक्ष्य तय करते समय देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियों का सम्मान जरूरी है। भारत का मानना है कि स्वैच्छिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं की प्रक्रियाओं को एक-दूसरे से मिलाने से देशों की प्राथमिकताओं तथा जिम्मेदारियों को लेकर असमंजस पैदा हो सकता है।
तुर्किये के एजेंडे में ऊर्जा के साथ भवन और कचरा क्षेत्र भी
तुर्किये ने 2035 तक विद्युतीकरण के अलावा वैश्विक कचरे की वृद्धि आधी करने और भवन क्षेत्र में ऊर्जा खपत की तीव्रता कम से कम 25 प्रतिशत घटाने का प्रस्ताव भी रखा है। COP-31 में भारत की ओर से भूपेंद्र यादव प्रतिनिधित्व करेंगे। सम्मेलन में इन प्रस्तावों के साथ जलवायु वित्त, ऊर्जा बदलाव और विकासशील देशों की जिम्मेदारियों जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। भारत का जोर रहेगा कि जलवायु कार्रवाई के लक्ष्य तय करते समय समानता, राष्ट्रीय संप्रभुता और विकास की जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जाए।