भारत ने हाल के दिनों में अपने पड़ोसी देशों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देते हुए यह संकेत दिया है कि क्षेत्रीय नेतृत्व की उसकी रणनीति अब और अधिक सक्रिय रूप ले रही है। म्यांमार और नेपाल के शीर्ष नेताओं के साथ बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि नई दिल्ली अपने निकटवर्ती देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाकर दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास का नया ढांचा तैयार करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
नेपाल के साथ भरोसे और विकास का नया अध्याय
नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व के एक वर्ग ने भारत-नेपाल संबंधों में सकारात्मक सहयोग, सीमा पार संपर्क, हवाई संपर्क और आधारभूत ढांचे के विकास पर जोर दिया है। पिछले वर्षों में कुछ राजनीतिक शक्तियों द्वारा सीमा विवादों को उभारकर राष्ट्रवादी भावनाओं को हवा देने की कोशिश की गई थी, लेकिन अब दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग और साझा विकास की संभावनाओं पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। भारत लंबे समय से नेपाल की आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय एकीकरण में सहयोगी भूमिका निभाने की बात करता रहा है।
म्यांमार के साथ रणनीतिक जुड़ाव का महत्व
भारत ने म्यांमार के नेतृत्व के साथ संपर्क बढ़ाकर अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों को देखते हुए म्यांमार के साथ सहयोग भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमापार समन्वय बढ़ने से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। यही कारण है कि नई दिल्ली म्यांमार के साथ संवाद को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सामरिक आवश्यकता के रूप में भी देख रही है।
पाकिस्तान और चीन को लेकर भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सीमा पार आतंकवाद समाप्त हुए बिना पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंधों की दिशा में कोई प्रगति संभव नहीं है। वहीं चीन के साथ संबंधों को लेकर भी भारत का रुख स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता पर निर्भर करेगा। नई दिल्ली का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना ही संतुलित कूटनीति आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
दक्षिण एशिया में प्रभाव बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति
भारत की विदेश नीति में भूटान, श्रीलंका, मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों का भी विशेष महत्व है। नई दिल्ली इन देशों के साथ आर्थिक सहयोग, आधारभूत ढांचा विकास और मानवीय सहायता के माध्यम से अपने संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपने पड़ोस में विश्वास, विकास और साझेदारी का मजबूत वातावरण तैयार करने में सफल रहता है, तो उसकी वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा को भी मजबूती मिलेगी। पड़ोस में स्थिरता और सहयोग ही भारत की व्यापक वैश्विक भूमिका की आधारशिला बन सकता है।