नई दिल्ली. भारत की सीमाओं को और अधिक अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से हो रही हथियारों, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए गृह मंत्रालय ने अत्याधुनिक तकनीक आधारित "स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड" लागू करने की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था में एंटी-ड्रोन शील्ड, स्मार्ट सेंसर, डिजिटल निगरानी प्रणाली और उन्नत फेंसिंग जैसी तकनीकों को शामिल किया जाएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी साबित होगी जहां हाल के वर्षों में ड्रोन आधारित तस्करी और घुसपैठ की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।
सीमा सुरक्षा का नया अध्याय, एंटी-ड्रोन शील्ड बनेगी सबसे बड़ा हथियार
पंजाब और जम्मू-कश्मीर सहित कई सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी एजेंसियों और तस्करी नेटवर्क द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। इन ड्रोन के माध्यम से हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थ भारतीय सीमा में पहुंचाने की कोशिशें की जाती रही हैं। इसी चुनौती का मुकाबला करने के लिए सरकार एंटी-ड्रोन शील्ड तैयार कर रही है, जो संदिग्ध ड्रोन की पहचान करने, उनकी निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। यह प्रणाली सीमा सुरक्षा बलों को रियल टाइम सूचना उपलब्ध कराएगी, जिससे किसी भी खतरे पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड से बदलेगी निगरानी की तस्वीर
नई सुरक्षा व्यवस्था केवल ड्रोन रोधी तकनीक तक सीमित नहीं रहेगी। स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड के अंतर्गत सीमा क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेंसर, निगरानी उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण प्रणाली और स्मार्ट फेंसिंग नेटवर्क स्थापित किए जाएंगे। इन तकनीकों की मदद से सीमाओं पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पहचान पहले से अधिक सटीकता और तेजी के साथ की जा सकेगी। सरकार का लक्ष्य है कि मानव संसाधनों पर निर्भरता कम करते हुए तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत बनाया जाए, जिससे सीमा सुरक्षा का स्तर वैश्विक मानकों के अनुरूप हो सके।
एलपीएमएस से होगा सीमा प्रबंधन का डिजिटलीकरण
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च किया गया लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम सीमा प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विभिन्न लैंड पोर्ट्स पर कार्गो और यात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ता है। इसके माध्यम से दस्तावेजी कार्यों में कमी आएगी, प्रक्रियाएं तेज होंगी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि व्यापार और आवागमन को भी अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।
एजेंसियों के बीच बढ़ेगा तालमेल, सुरक्षा होगी और मजबूत
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि एलपीएमएस और स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड मिलकर भविष्य की सीमा सुरक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव बनेंगे। इनके जरिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की क्षमता बढ़ेगी और संभावित खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। सरकार के अनुसार नई प्रणाली लागू होने के बाद कार्गो ट्रकों के इंतजार का समय घटेगा, सीमा चौकियों पर प्रक्रिया तेज होगी और सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। यह पहल भारत की सीमाओं को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।