नई दिल्ली। वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ते सुरक्षा संकट के बीच फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय झंडे वाले जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेड सी (लाल सागर), ब्लैक सी (काला सागर) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना की तैनाती बढ़ाने की मांग की है। संगठन ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग बेहद संवेदनशील हो गए हैं और भारतीय नाविकों की जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। FSUI ने बुधवार (5 अगस्त) को प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। संगठन का कहना है कि भारतीय व्यापारी जहाज लगातार उन समुद्री मार्गों से गुजर रहे हैं जहां हाल के महीनों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में भारतीय नौसेना की सक्रिय मौजूदगी भारतीय जहाजों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
ईरान-इजरायल तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध बना बड़ी चिंता
यूनियन ने अपने पत्र में कहा कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रेड सी, ब्लैक सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग संघर्ष प्रभावित क्षेत्र बन चुके हैं। इन इलाकों से रोजाना सैकड़ों व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी तैनात रहते हैं। संगठन ने कहा कि लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों ने मर्चेंट शिपिंग के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती पैदा कर दी है। ऐसे हालात में यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो भारतीय नागरिकों और देश के व्यापारिक हितों पर भी असर पड़ सकता है।
बाब-अल-मंदेब में जहाज पर हमले का दिया हवाला
FSUI ने अपने पत्र में हाल ही में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर हुए हमले का भी उल्लेख किया है। यूनियन का कहना है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि समुद्री मार्ग अब पहले से कहीं अधिक जोखिमपूर्ण हो चुके हैं। भारतीय नाविक लगातार ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जहां किसी भी समय हमला हो सकता है। संगठन ने सरकार से अनुरोध किया कि जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती, तब तक भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और अन्य सुरक्षा संसाधनों की तैनाती बढ़ाई जाए ताकि भारतीय जहाजों को आवश्यक सुरक्षा मिल सके।
भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की मांग
यूनियन ने विशेष रूप से बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में भारतीय नौसेना की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षा एस्कॉर्ट उपलब्ध कराया जाए और जरूरत पड़ने पर नौसेना के जहाजों की निगरानी में उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला जाए।
इसके अलावा भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने, आपातकालीन सहायता तंत्र विकसित करने तथा जहाज संचालकों के साथ समन्वय बढ़ाने की भी मांग की गई है।
विदेश मंत्रालय ने भी जताई चिंता
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय जहाज पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि विदेशों में भारतीय नागरिकों और भारतीय समुद्री हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक सप्लाई चेन, तेल परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। भारत का भी बड़ा आयात-निर्यात इन्हीं मार्गों के जरिए होता है, इसलिए इन समुद्री रास्तों की सुरक्षा देश की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।