नई दिल्ली- इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse) से जुड़े कथित विज्ञापनों के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने Meta को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है और ऐसे सभी विज्ञापनों व कंटेंट को तत्काल ब्लॉक तथा हटाने के निर्देश दिए हैं। यह नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया।
IT मंत्रालय ने दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इंस्टाग्राम पर यदि कोई भी ऐसा विज्ञापन या सामग्री मौजूद है, जो बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देती है या ऐसे कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराती है, तो उसे तुरंत हटाया जाए। मंत्रालय ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसी सामग्री प्लेटफॉर्म पर कैसे पहुंची और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
BBC की रिपोर्ट के बाद मचा हड़कंप
यह कार्रवाई BBC की एक खोजी रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन दिखाई दे रहे थे, जिनमें 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर क्लिक करने वाले यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत पर बेचा जा रहा था।
Meta के मॉडरेशन सिस्टम पर उठे सवाल
BBC की रिपोर्ट में कहा गया कि इंस्टाग्राम पर कोई भी विज्ञापन Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होता है। रिपोर्ट के मुताबिक जब BBC ने ऐसे एक विज्ञापन की शिकायत की तो शुरुआती प्रतिक्रिया में Meta ने उसे अपनी कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं माना।
हालांकि बाद में कंपनी ने कहा कि उसने कई आपत्तिजनक विज्ञापन हटा दिए हैं, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और विवादित URL भी प्लेटफॉर्म से हटा दिए हैं। Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होता।
WhatsApp फीचर पर भी भेजा जा चुका है नोटिस
इससे पहले केंद्र सरकार ने 1 जुलाई को Meta को WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी नोटिस जारी किया था। अब इंस्टाग्राम से जुड़ा यह मामला कंपनी के लिए एक और बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
भारत में कानून क्या कहता है?
भारतीय कानून के तहत बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का निर्माण, संग्रह, देखना, साझा करना, बेचना या प्रसारित करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है और संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं पर सख्त दंड लगाया जा सकता है।