नई दिल्ली: अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट में आई-पैक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान माहौल काफी गर्म रहा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।
ED की याचिका और CBI जांच की मांग
ED ने अदालत में दावा किया कि जनवरी 2026 में कोलकाता स्थित आई-पैक दफ्तर और एक संबंधित व्यक्ति के घर पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से जांच प्रभावित हुई। एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान अहम दस्तावेजों को हटाया गया। ED ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई कर रही बेंच ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया में दखल देना चिंताजनक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की स्थिति न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित संकेत नहीं देती।
अभूतपूर्व स्थिति’ पर कोर्ट की चिंता
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा मामला बेहद असामान्य है, जहां एक मुख्यमंत्री कथित तौर पर जांच के दौरान मौके पर पहुंचती हैं। अदालत ने इसे केवल राज्य और केंद्र के बीच का टकराव मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कानून के शासन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।
राज्य सरकार का जवाब
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकीलों ने सभी आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने किसी भी जांच में बाधा नहीं डाली और इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की जा रही है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छापेमारी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई में ED की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।