बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण की खबरों और कर्मचारियों के बीच पनपती आशंकाओं पर विराम लगाते हुए इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतरिक्ष एजेंसी का कोई निजीकरण नहीं किया जा रहा है। बेंगलुरु स्पेस एक्सपो के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए नारायणन ने कहा कि इसरो एक सरकारी संगठन है और यह सरकारी निवेश के साथ ही काम करता रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति का मकसद एजेंसी की भूमिका को घटाना नहीं, बल्कि देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) और इकोसिस्टम का विस्तार करना है।
कर्मचारी संघों ने जताई थी चिंता, चेयरमैन ने दिया भरोसा
हाल ही में इसरो के विभिन्न केंद्रों के कम से कम नौ कर्मचारी संघों (Employee Associations) ने अध्यक्ष वी. नारायणन को पत्र लिखकर अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण अभियान पर स्पष्टीकरण मांगा था। इन संघों ने IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयनका के उस बयान पर चिंता जताई थी, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में इसरो किसी लॉन्च वाहन का निर्माण नहीं करेगा। कर्मचारी संगठनों ने पूछा था कि भविष्य में इसरो की भूमिका क्या होगी, कर्मचारियों के हितों की रक्षा कैसे होगी और तकनीक हस्तांतरण के क्या नियम होंगे। इस पर नारायणन ने कहा, "मेरे सहयोगियों की चिंताएं जायज हैं और उन्हें स्पष्ट करना हमारी जिम्मेदारी है। हम अपने 20,000 कर्मचारियों की हर शंका को दूर करेंगे।"
निजी उद्योगों की भागीदारी नई नहीं, 80% बजट भारतीय उद्योगों में होता है निवेश
इसरो प्रमुख ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में निजी उद्योगों की भागीदारी कोई नई बात नहीं है। जब भी कोई PSLV, GSLV या LVM3 रॉकेट उड़ान भरता है, तो उसका लगभग 80 प्रतिशत बजट भारतीय उद्योगों में ही निवेश किया जाता है। वर्तमान में लगभग 450 भारतीय कंपनियां और एमएसएमई (MSME) इसरो के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में छह साल पहले शुरू किए गए सुधारों का उद्देश्य निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना था ताकि देश की क्षमताओं को बढ़ाया जा सके।
हर साल 50 लॉन्च वाहन की आवश्यकता, इसरो अकेले नहीं कर सकता काम
डॉ. नारायणन ने देश की बढ़ती जरूरतों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में अंतरिक्ष में भारत के 56 उपग्रह (Space Assets) काम कर रहे हैं, लेकिन आगामी 6 से 7 वर्षों में कम से कम 200 से 300 नए उपग्रहों का निर्माण और प्रक्षेपण करना होगा। उन्होंने कहा, "जब मैं 1984 में इसरो में शामिल हुआ था, तब तीन साल में एक लॉन्च होता था। आज हम हर महीने एक लॉन्च कर रहे हैं। लेकिन देश की आवश्यकता प्रति वर्ष लगभग 50 लॉन्च वाहनों की है। इतना बड़ा लक्ष्य अकेले इसरो पूरा नहीं कर सकता, इसके लिए उद्योग और निजी क्षेत्र को साथ आना ही होगा।"
इसरो का ध्यान अनुसंधान और अग्रिम मिशनों पर केंद्रित रहेगा
इसरो की ओर से जारी एक विस्तृत बयान में साफ किया गया है कि अंतरिक्ष एजेंसी देश में उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए मुख्य संस्थान बनी रहेगी। नियमित और स्थापित प्रणालियों—जैसे उपग्रहों और रॉकेटों के बड़े पैमाने पर उत्पादन—का काम उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को सौंपा जाएगा। इससे इसरो अपने वैज्ञानिकों और संसाधनों का उपयोग चंद्रयान-4, चंद्रयान-5, शुक्र ऑर्बिटर मिशन (VOM), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) जैसी उन्नत व रणनीतिक तकनीकों के विकास में कर सकेगा।