भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को सफल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अंतरिक्ष यात्रियों यानी गगनयात्रियों की सुरक्षा और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए ‘मिशन मित्र’ की शुरुआत की गई है।
लेह में हो रहा है विशेष अध्ययन
इस मिशन का संचालन लेह में 2 से 9 अप्रैल तक किया जा रहा है। यहां का उच्च-ऊंचाई वाला वातावरण, कम ऑक्सीजन और बेहद कम तापमान अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों का अनुभव कराता है, जिससे यह अध्ययन के लिए आदर्श स्थान बनता है।
क्या है मिशन मित्र का उद्देश्य
‘मिशन मित्र’ का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती और टीम वर्क का आकलन करना है। यह मिशन यह समझने में मदद करेगा कि कठिन परिस्थितियों में क्रू सदस्य कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और एक-दूसरे के साथ तालमेल कैसे बैठाते हैं।
टीम व्यवहार पर पहली बड़ी स्टडी
ISRO और भारतीय वायु सेना के एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान द्वारा तैयार किया गया यह अपनी तरह का पहला टीम बिहेवियर स्टडी है। इसमें क्रू और ग्राउंड टीम के बीच तालमेल, निर्णय लेने की क्षमता और तनाव में काम करने की दक्षता का विश्लेषण किया जाएगा।
क्यों जरूरी है यह मिशन
मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों में क्रू की सुरक्षा और प्रदर्शन सबसे अहम होता है। प्रभावी संचार, मानसिक संतुलन और टीम सपोर्ट किसी भी मिशन की सफलता तय करते हैं। ऐसे में ‘मिशन मित्र’ भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों में परीक्षण
यह मिशन एक एनालॉग मिशन है, जिसमें नियंत्रित लेकिन वास्तविक जैसी परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है। लेह का वातावरण — कम ऑक्सीजन (हाइपोक्सिया), ठंड और अलगाव — अंतरिक्ष मिशन के लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला का काम करता है।
गगनयान मिशन का बड़ा लक्ष्य
गगनयान परियोजना के तहत ISRO का लक्ष्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को करीब 400 किमी की कक्षा में भेजकर तीन दिन तक मिशन संचालित करना और सुरक्षित वापस लाना है। इसके तहत पहले तीन बिना चालक (Uncrewed) और फिर एक मानवयुक्त मिशन भेजा जाएगा।
कौन हैं संभावित गगनयात्री
इस मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों में शुभांशु शुक्ला, प्रसांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप शामिल हैं, जो इस ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बन सकते हैं।