श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने हालात गंभीर कर दिए हैं। दक्षिण और उत्तर कश्मीर के कई इलाकों में अचानक आई फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) से नदी-नाले उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों और यात्रियों से सतर्क रहने तथा नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन कई इलाकों में संपत्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
कुलगाम में बादल फटने से बढ़ा खतरा
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के नंदीमार्ग इलाके में तेज बादल फटने से नमलन नाला और आसपास की जलधाराओं का जलस्तर अचानक बढ़ गया। करीब 90 मिनट तक हुई मूसलाधार बारिश और तेज तूफान के कारण कई छोटे नाले उफान पर आ गए, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई।
उरी बॉर्डर इलाके में भी बादल फटा
उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के उरी बॉर्डर क्षेत्र में भी शाम के समय बादल फटने की घटना हुई। इसके बाद डजना और लचिपुरा क्षेत्रों में स्थानीय नाले का पानी किनारों से बाहर आ गया। तेज बहाव के कारण कुछ इमारतों को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।
झेलम बेसिन सुरक्षित, लेकिन पहाड़ी नालों में खतरा बरकरार
श्रीनगर मौसम केंद्र के अनुसार फिलहाल मुख्य झेलम बेसिन में बाढ़ का खतरा कम है, लेकिन घाटी में लगातार हो रही बारिश और गरज-चमक के कारण पहाड़ी नालों और छोटी जलधाराओं में अचानक जलस्तर बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
पहले भी कई इलाकों में हुआ नुकसान
इस सप्ताह की शुरुआत में भी घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में बादल फटने की कई घटनाएं हुई थीं। पहलगाम का बटकूट-लांगनाई पुल क्षतिग्रस्त हो गया था, जबकि अनंतनाग के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई थी।
IMD ने जारी किया बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक घाटी में रुक-रुक कर बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार खराब मौसम के चलते फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा।
लोगों और यात्रियों के लिए एडवाइजरी
प्रशासन ने नदी किनारे, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। यात्रियों से कहा गया है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
50 से ज्यादा बादल फटने की घटनाएं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जम्मू-कश्मीर में अब तक 50 से अधिक बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में करीब 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि घरों, सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।