जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में स्थित कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम हुए आतंकवादी हमले में दो प्रवासी मजदूरों की हत्या ने घाटी में एक बार फिर सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं को जन्म दे दिया है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर घटना को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। इस घटना ने न केवल प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन लगातार आतंकी हमलों की भी याद दिला दी है, जिनमें गैर-स्थानीय नागरिकों और आम लोगों को चुनकर निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं का उद्देश्य केवल जनहानि करना नहीं, बल्कि भय का वातावरण बनाकर सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना भी होता है।
टारगेट किलिंग की चुनौती बनी सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी परीक्षा
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का स्वरूप बदलता दिखाई दिया है। सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों से आतंकवादी संगठनों को भारी नुकसान पहुंचने के बावजूद उन्होंने आम नागरिकों, प्रवासी श्रमिकों, व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाओं का मकसद घाटी में सामान्य स्थिति की बहाली के प्रयासों को प्रभावित करना और लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करना होता है। यही कारण है कि प्रत्येक ऐसी घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां न केवल हमलावरों की तलाश तेज करती हैं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा प्रबंध भी किए जाते हैं।
पहलगाम हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था
घाटी में हाल के वर्षों की सबसे चर्चित आतंकी घटनाओं में पहलगाम क्षेत्र की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुआ हमला भी शामिल है। उस हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था, जिसमें 25 पर्यटकों सहित कुल 26 लोगों की मृत्यु हुई थी। इस घटना के बाद देशभर में व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली और जम्मू-कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर भी गहरा प्रभाव पड़ा। कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं स्थगित कर दीं, जबकि स्थानीय पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सुरक्षा एजेंसियों ने इसके बाद पर्यटन स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली नई घटनाएं चुनौती को पूरी तरह समाप्त नहीं होने देतीं।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
जम्मू-कश्मीर में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों प्रवासी श्रमिक निर्माण कार्य, कृषि, बागवानी और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के लिए आते हैं। ऐसे श्रमिक स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जब भी उन्हें निशाना बनाया जाता है, उसका प्रभाव केवल संबंधित परिवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोजगार, व्यापार और विकास परियोजनाओं पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी श्रमिकों का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर उनके ठहरने वाले क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने जैसे कदम उठाती रही हैं।
मुख्यमंत्री ने की घटना की निंदा, राहत पैकेज की घोषणा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायरतापूर्ण और अमानवीय बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और प्रशासन को दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए व्यापक आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा भी की गई है। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सुरक्षा एजेंसियां इस हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं।
शांति और सामान्य स्थिति की राह में सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में बीते वर्षों के दौरान पर्यटन, निवेश और आधारभूत ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बड़ी संख्या में पर्यटक घाटी पहुंच रहे हैं और कई विकास परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे समय में आतंकवादी संगठन इस प्रकार की घटनाओं के माध्यम से सामान्य स्थिति को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार केवल सुरक्षा अभियानों से ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी, खुफिया तंत्र की मजबूती और सामाजिक विश्वास कायम रखने से भी ऐसी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। कुलगाम की ताजा घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के विरुद्ध सतत सतर्कता और समन्वित सुरक्षा रणनीति भविष्य में भी उतनी ही आवश्यक रहेगी।