नई दिल्ली - केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे अपने भाषण का कम से कम पांच मिनट एंटी-पेपर लीक बिल की वास्तविक खूबियों और प्रावधानों पर केंद्रित करें, ताकि छात्रों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक चर्चा हो सके।
बिल पर चर्चा के बजाय राजनीति का आरोप
पत्रकारों से बातचीत में किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचितसाधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक लेकर आई है। उनके अनुसार यह कानून देशभर के छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के जवाब में तैयार किया गया है।रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्ष के कई सदस्यों ने विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी की। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण कानून पर गंभीर बहस होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष गैर-जरूरी मुद्दे उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
राहुल गांधी की भाषा पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की भाषा पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवाद की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। रिजिजू ने कहा, "राहुल गांधी हर तरह की अलोकतांत्रिक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो संसदीय लोकतंत्र के अनुकूल नहीं है। सभ्य और शालीन भाषा का उपयोग किया जाना चाहिए। विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह की अपमानजनक और बहुत ही नीची भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह लोकतंत्र और देश दोनों के लिए उचित नहीं है।"
छात्रों के हित में कानून पर जोर
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि एंटी-पेपर लीक कानून पर सभी दल रचनात्मक सुझाव दें, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर गंभीर चर्चा करेगा।