कोलकाता: विधानसभा चुनाव में करारी हार और भ्रष्टाचार के मामलों में छोटे-बड़े नेताओं की लगातार गिरफ्तारियों के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संकट गहराता जा रहा है। अब कोलकाता नगर निगम (KMC) भी तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण से बाहर जाता हुआ दिख रहा है। निगम के भीतर जारी भारी उठापटक के बीच खबर है कि मेयर परिषद के कद्दावर सदस्य (MMIC) तारक सिंह मंगलवार (आज) दोपहर करीब 4 बजे अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
निगम में लगातार हो रहे इस्तीफों से हड़कंप
चुनाव नतीजों के बाद से ही कोलकाता नगर निगम में टीएमसी का संकट लगातार चौड़ा होता जा रहा है। तारक सिंह से पहले भी कई बड़े चेहरे अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं:
सुशांत घोष: कस्बा के वार्ड नंबर 108 के टीएमसी पार्षद सुशांत घोष ने पिछले बुधवार को बोरो चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था।
देबलीना विश्वास: दबाव के चलते बोरो 9 की चेयरपर्सन देबलीना विश्वास पहले ही पद छोड़ चुकी हैं।
अरूप चक्रवर्ती: दक्षिण कोलकाता के पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने भी नगर निगम की अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है।
अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों को नोटिस भेजने पर बढ़ा विवाद
TMC के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह कलह उस समय चरम पर पहुंच गई जब कोलकाता नगर निगम की ओर से टीएमसी के 'सेकंड-इन-कमांड' अभिषेक बनर्जी की 17 संपत्तियों की वैधता** को लेकर नोटिस भेजा गया। इस नोटिस के बाद से ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और निगम के अधिकारियों के बीच खींचतान तेज हो गई।
तारक सिंह पिछले काफी समय से बागी रुख अपनाए हुए थे। वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर पार्षदों और मेयर परिषद के सदस्यों की बुलाई गई दो महत्वपूर्ण बैठकों में भी शामिल नहीं हुए थे। हाल ही में उन्होंने पार्टी सुप्रीमो और अखिल भारतीय महासचिव की भूमिका की खुलेआम आलोचना भी की थी।
प्रशासनिक गतिरोध: क्या जाएगी मेयर फिरहाद हकीम की कुर्सी?
निगम के भीतर मचे इस घमासान के कारण कोलकाता नगर निगम का मासिक अधिवेशन (Monthly Session) रद्द कर दिया गया है और मेयर परिषद की बैठकें भी नहीं हो पा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में हार के बाद से मेयर फिरहाद (बॉबी) हकीम और नगर निगम कमिश्नर स्मिता पांडे के बीच दूरियां काफी बढ़ गई हैं, जिससे निगम में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है।
इस स्थिति को देखते हुए अब राजनीतिक गलियारों में यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि विपक्षी दबाव के बीच मौजूदा बोर्ड कितने दिनों तक काम कर पाएगा और मेयर के पद पर 'बॉबी हकीम' कितने दिनों के मेहमान हैं? इस राजनीतिक उठापटक का सीधा असर कोलकाता की नागरिक सेवाओं और विकास कार्यों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।