नई दिल्ली. लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार देश में अपना प्रवेश दर्ज करा दिया है। केरल तट पर मानसून की दस्तक के साथ ही मौसम के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून की सक्रियता धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ रही है, जिसके प्रभाव से कई राज्यों में वर्षा गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून का शुरुआती चरण काफी सक्रिय दिखाई दे रहा है, जिससे अनेक क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना बन रही है।
19 राज्यों में जारी हुआ आंधी-तूफान और भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने देश के करीब 19 राज्यों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार आगामी कुछ दिनों के दौरान अनेक क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। इसके साथ ही कई स्थानों पर 70 से 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी है ताकि किसी भी आपात स्थिति का समय रहते सामना किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
राजधानी क्षेत्र में दो चरणों में बदलेगा मौसम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार दिन के पहले हिस्से में आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की वर्षा और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं शाम और रात के समय एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है। कुछ इलाकों में हल्की फुहारें पड़ने और बादलों की गर्जना सुनाई देने की संभावना जताई गई है। मौसम में यह बदलाव भीषण गर्मी से राहत तो देगा, लेकिन यातायात और दैनिक गतिविधियों पर प्रभाव भी डाल सकता है।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक असर
मौसम विभाग के विस्तृत पूर्वानुमान के अनुसार केरल, कर्नाटक और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहेगा। इन क्षेत्रों में अगले पांच से सात दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। विशेष रूप से उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा दर्ज हो सकती है। वहीं असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में लगातार वर्षा के साथ तेज हवाओं का दौर बना रह सकता है। इन क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर में वृद्धि और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ेगा वर्षा का दबाव
पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां तेजी से मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में आगामी दिनों में व्यापक वर्षा दर्ज की जा सकती है। इन राज्यों में 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। पर्वतीय और नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी स्थितियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
कुछ राज्यों को अभी नहीं मिलेगी गर्मी से राहत
जहां एक ओर देश के बड़े हिस्से में मानसून राहत लेकर आ रहा है, वहीं कुछ राज्यों को अभी भी गर्मी और उमस का सामना करना पड़ेगा। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में मौसम फिलहाल गर्म और उमस भरा बना रहेगा। इन क्षेत्रों में तापमान भले ही अत्यधिक न हो, लेकिन नमी बढ़ने के कारण लोगों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे राहत मिलने की संभावना बनेगी।
बिहार में फिर लौट सकती है लू की मार
मानसून की सक्रियता के बीच बिहार के लिए मौसम विभाग ने अलग प्रकार की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में 6 जून से एक बार फिर लू जैसी परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं। तापमान में बढ़ोतरी के साथ गर्म हवाओं का प्रभाव लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की प्रगति में थोड़ी देरी वाले क्षेत्रों में अभी कुछ दिनों तक गर्मी का प्रभाव बना रह सकता है।
राहत और चुनौती दोनों लेकर आया मानसून
देश में मानसून का आगमन जहां किसानों, जलाशयों और पेयजल व्यवस्था के लिए राहत की खबर है, वहीं इसके साथ आने वाली अत्यधिक वर्षा और तेज हवाएं नई चुनौतियां भी लेकर आई हैं। आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना आवश्यक होगा। प्रशासनिक तैयारियों के साथ नागरिकों की सतर्कता भी किसी संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन कर लोग स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।