कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विधायक हस्ताक्षर गड़बड़ी मामले में पूछताछ के लिए सीआईडी के समन को चुनौती दी थी। यह मामला विधानसभा में चार अहम पदों के नामांकन प्रस्तावों से जुड़े विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित असमानता से संबंधित है।
सीआईडी समन को चुनौती और गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग
अभिषेक बनर्जी ने 3 जून को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीआईडी समन को चुनौती दी थी और किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, से सुरक्षा की मांग की थी। इसी याचिका में उनके वकील ने जल्द सुनवाई की अपील भी की थी, लेकिन जस्टिस चैताली चट्टोपाध्याय की एकल अवकाश पीठ ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
15 दिन का समय और सीआईडी की नई तारीख
सीआईडी ने पहले अभिषेक बनर्जी को 1 जून को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन उन्होंने उस दिन पेश होने के बजाय 15 दिन का समय मांगा। उन्होंने दावा किया कि 30 मई को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हुए कथित हमले के बाद उनकी शारीरिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बाद सीआईडी ने नया समन जारी करते हुए उन्हें 8 जून को पेश होने के लिए कहा।
विधानसभा नामांकन और हस्ताक्षर विवाद से शुरू हुआ मामला
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के नए स्पीकर को पत्र लिखकर चार नेताओं के नामों का प्रस्ताव भेजा था, जिसमें नेता प्रतिपक्ष, दो उपनेता और मुख्य सचेतक के नाम शामिल थे। स्पीकर ने निर्देश दिया था कि इन नामों के समर्थन में विधायकों के हस्ताक्षर वाला औपचारिक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया जाए।
हस्ताक्षर मेल न खाने पर सीआईडी जांच शुरू
तृणमूल कांग्रेस विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव स्पीकर कार्यालय में जमा किया गया, लेकिन बाद में दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कुछ हस्ताक्षरों के मेल न खाने की शिकायत की। इसके बाद मामला विधानसभा सचिवालय से सीआईडी को सौंप दिया गया, जिसके बाद जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए समन जारी किया।