नई दिल्ली/श्रीनगर: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पाकिस्तान कनेक्शन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आतंकियों के मोबाइल फोन में हमले वाली जगह बायसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट पहले से सेव थे। साथ ही जिन चीनी मोबाइल फोन का इस्तेमाल आतंकियों ने किया, उनकी सप्लाई चेन की जांच में पता चला है कि वे पहले पाकिस्तान के कराची और लाहौर के पते पर भेजे गए थे। एजेंसी का मानना है कि हमला पूरी तरह से योजनाबद्ध था और इसकी तैयारी कई दिन पहले से की गई थी।
आतंकियों के फोन में मिली बायसरन घाटी की जानकारी
NIA सूत्रों के अनुसार फोरेंसिक जांच में आतंकियों के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिले हैं। जांच में सामने आया कि बायसरन घाटी की भौगोलिक लोकेशन नेविगेशन एप में पहले से दर्ज थी और इलाके के स्क्रीनशॉट भी मोबाइल में सुरक्षित रखे गए थे। एजेंसी के मुताबिक ये स्क्रीनशॉट 15 और 16 अप्रैल 2025 को लिए गए थे, जबकि हमला 22 अप्रैल को हुआ था। इससे साफ संकेत मिलता है कि आतंकियों ने हमले से पहले इलाके की रेकी की थी और पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम दिया।
पाकिस्तान से जुड़ी मोबाइल सप्लाई चेन का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि आतंकियों के इस्तेमाल किए गए दो चीनी मोबाइल फोन पहले पाकिस्तान के कराची और लाहौर स्थित पतों पर डिलीवर किए गए थे। सप्लाई चेन रिकॉर्ड के आधार पर NIA यह पता लगाने में जुटी है कि ये डिवाइस पाकिस्तान से आतंकियों तक कैसे पहुंचे। एजेंसी का मानना है कि इससे सीमा पार बैठे आतंकियों के नेटवर्क और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम का खुलासा हो सकता है।
चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा था GoPro कैमरा
NIA की जांच में यह भी पता चला कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पास अमेरिकी कंपनी GoPro का हाई-टेक कैमरा था, जो चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा था। एजेंसी के मुताबिक इस कैमरे का इस्तेमाल हमले की रिकॉर्डिंग और बाद में प्रचार सामग्री तैयार करने के लिए किया जाना था। जांच एजेंसी ने GoPro कंपनी से संपर्क कर कैमरे की सप्लाई चेन की जानकारी हासिल की है और अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चीन से यह उपकरण आतंकी नेटवर्क तक कैसे पहुंचा।
चार्जशीट में पाकिस्तान की भूमिका का दावा
NIA द्वारा दाखिल चार्जशीट में कहा गया है कि पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा था, जो पाकिस्तान के लाहौर क्षेत्र में रहता है। एजेंसी का दावा है कि हमले के दौरान वह लगातार आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें रियल टाइम निर्देश दे रहा था। चार्जशीट के अनुसार बायसरन घाटी की लोकेशन भी उसी ने आतंकियों को उपलब्ध कराई थी।
टूरिस्ट गाइडों की भूमिका भी जांच के घेरे में
NIA चार्जशीट के अनुसार स्थानीय टूरिस्ट गाइड परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार ने हमले से पहले आतंकियों को इलाके में देखा था, लेकिन इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। एजेंसी का कहना है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती तो हमले को रोका जा सकता था। दोनों गाइडों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है।
ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे तीनों आतंकी
जांच एजेंसी के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल पाकिस्तानी आतंकी फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी को 28 जुलाई 2025 को सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया था। वहीं हमले का मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा अब भी फरार है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है।