महाराष्ट्र के परभणी जिले की मानवत तहसील स्थित प्रसिद्ध यशवाड़ी मारुति मंदिर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब मंदिर के सामने बना सभा मंडप अचानक भरभराकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला। कुछ ही क्षणों में पूरा ढांचा मलबे में तब्दील हो गया और चारों ओर चीख-पुकार का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं ने तत्काल राहत कार्य शुरू करते हुए मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया।
30 से 40 लोगों के दबे होने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सभा मंडप गिरने के समय वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक लगभग 30 से 40 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि आधिकारिक रूप से फंसे लोगों की संख्या की पुष्टि अभी नहीं की गई है। बचाव दल लगातार मलबा हटाने के कार्य में जुटे हुए हैं और प्रत्येक संभावित स्थान की सावधानीपूर्वक जांच की जा रही है ताकि किसी भी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए। राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की सहायता से मलबा हटाने का काम जारी है। अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित घेरा बनाकर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी है ताकि बचाव कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
अस्पतालों को किया गया अलर्ट
संभावित घायलों की संख्या को देखते हुए स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। चिकित्सकों की अतिरिक्त टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। एम्बुलेंस सेवाओं को भी घटनास्थल पर तैनात किया गया है ताकि घायल व्यक्तियों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके। प्रशासन का प्रयास है कि राहत कार्य के साथ-साथ चिकित्सा सहायता भी बिना किसी देरी के प्रभावित लोगों तक पहुंचे।
हादसे के कारणों की होगी विस्तृत जांच
सभा मंडप के अचानक ढहने के पीछे क्या कारण रहे, इसकी जांच के आदेश दिए जाने की संभावना है। प्रारंभिक स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता, संरचना की स्थिति और रखरखाव संबंधी पहलुओं को जांच के दायरे में लिया जा सकता है। विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेगी। प्रशासन का कहना है कि हादसे के वास्तविक कारण सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
श्रद्धालुओं में चिंता, पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल
इस दुर्घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में गहरा शोक और चिंता का वातावरण है। स्थानीय लोग लगातार राहत कार्य में सहयोग कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यशवाड़ी मारुति मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है, इसलिए इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। सभी की निगाहें अब बचाव अभियान पर टिकी हैं और लोग मलबे में फंसे श्रद्धालुओं के सुरक्षित बाहर निकलने की प्रार्थना कर रहे हैं।