कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति से जुड़े कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच अब और तेज हो गई है। इसी क्रम में राज्य पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (CID) की टीम ने वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय के आवास का दौरा कर मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की।
क्या है पूरा मामला?
विवाद उस समय शुरू हुआ था जब विधानसभा अध्यक्ष को एक प्रस्ताव सौंपा गया, जिसमें वरिष्ठ टीएमसी विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित करने की मांग की गई थी। बाद में कई विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किए गए या फिर उनके हस्ताक्षर जाली तरीके से लगाए गए थे।इन आरोपों के आधार पर पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई।
जांच में सीआईडी की सक्रियता
मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जांच एजेंसी ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को भबानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में तलब कर लंबी पूछताछ की है। इसके अलावा, दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के कारण सीआईडी की टीम वरिष्ठ मंत्री और नेता फिरहाद हकीम के आवास पर भी पहुंच चुकी है। जांच अधिकारी विधानसभा भवन का भी दौरा कर चुके हैं, जहां से उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड और प्रस्ताव की प्रतियां जुटाई हैं।
शोभनदेब ने कहा- जांच में पूरा सहयोग
सीआईडी अधिकारियों के सवालों का सामना करने के बाद शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं। हालांकि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से ज्यादा टिप्पणी करने से परहेज किया।
आगे क्या?
सीआईडी अब दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रस्ताव में लगाए गए हस्ताक्षर वास्तविक थे या फिर किसी प्रकार की जालसाजी की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आने वाले दिनों में और भी नेताओं से पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।