कोलकाता। पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस दिन को बंगाल के इतिहास का महत्वपूर्ण और गौरवशाली अध्याय बताया। इस मौके पर उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण के दौर का अंत हो चुका है तथा अब राज्य के वास्तविक इतिहास को सम्मान मिल रहा है।
पश्चिम बंगाल दिवस को बताया ऐतिहासिक अवसर
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि 20 जून पश्चिम बंगाल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल राज्य के गठन की याद नहीं दिलाता, बल्कि उन संघर्षों और बलिदानों को भी सम्मान देता है, जिनकी बदौलत पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों को पश्चिम बंगाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह अवसर बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, पहचान और गौरव को याद करने का दिन है।
‘इतिहास को दबाने की कोशिश अब खत्म’
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि वर्षों तक पश्चिम बंगाल के गठन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को उचित महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अब पहली बार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से प्रेरित राष्ट्रवादी सरकार आधिकारिक रूप से पश्चिम बंगाल दिवस मना रही है। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य के इतिहास को दबाने और लोगों को उनकी जड़ों से दूर करने की कोशिश की गई थी, लेकिन अब वह दौर समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि इतिहास को हमेशा के लिए छिपाया नहीं जा सकता और सत्य को उसका उचित स्थान मिलना ही चाहिए।
पिछली सरकार पर लगाया वोट बैंक राजनीति का आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण पश्चिम बंगाल दिवस के महत्व को कम करके दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राज्य के निर्माण में योगदान देने वाले नेताओं और ऐतिहासिक घटनाओं को भुलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता को अपने इतिहास और उन महान व्यक्तित्वों के योगदान को जानना चाहिए, जिन्होंने राज्य की पहचान और अस्तित्व को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बताया पश्चिम बंगाल का शिल्पकार
सुवेंदु अधिकारी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पश्चिम बंगाल का शिल्पकार बताते हुए कहा कि यदि उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व नहीं होता तो आज पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा नहीं होता। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने की चर्चा चल रही थी, तब डॉ. मुखर्जी ने इसका मजबूती से विरोध किया और पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखने के लिए निर्णायक भूमिका निभाई।
राज्य निर्माण में योगदान देने वालों को किया याद
सुवेंदु अधिकारी ने इस अवसर पर Swami Pranavananda और उन सभी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा तत्कालीन पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के निर्माण और उसकी पहचान को सुरक्षित रखने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों की बदौलत बंगाली संस्कृति, भाषा और विरासत आज भी सुरक्षित है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच रही है।
विकसित और समृद्ध बंगाल के निर्माण का आह्वान
पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर सुवेंदु अधिकारी ने राज्यवासियों से एक सुरक्षित, समृद्ध और विकसित बंगाल के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श और राष्ट्रहित की भावना आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी नागरिकों को मिलकर काम करना होगा, ताकि राज्य विकास, शिक्षा, संस्कृति और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सके।