नई दिल्ली. उत्तर भारत के बड़े हिस्से में इन दिनों मौसम ने करवट ले ली है। भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को प्री-मानसून गतिविधियों ने राहत पहुंचाई है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बादलों की आवाजाही और बीच-बीच में हो रही वर्षा ने तापमान को नियंत्रित रखा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है। तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ होने वाली बारिश से जहां गर्मी का प्रभाव कम होगा, वहीं कुछ क्षेत्रों में जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने के संकेत
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में उन्नीस से बाईस जून के बीच हल्की से मध्यम वर्षा देखने को मिल सकती है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रहने के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पच्चीस जून तक रुक-रुक कर बारिश का क्रम जारी रह सकता है। इससे तापमान में बड़ी वृद्धि की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई दे रही है और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आंधी-तूफान का विशेष अलर्ट
पूर्वी उत्तर प्रदेश में उन्नीस से चौबीस जून के बीच आंधी, गरज-चमक और वर्षा की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। दूसरी ओर राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मौसम गतिविधियां तेज होने वाली हैं। विशेष रूप से बीस जून को कई क्षेत्रों में सत्तर किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से धूल भरी आंधी चल सकती है। पश्चिमी राजस्थान में चौबीस और पच्चीस जून को भारी वर्षा की भी संभावना जताई गई है, जिससे कुछ स्थानों पर जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी वर्षा की गतिविधि
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी आगामी दिनों में मौसम सक्रिय रहने वाला है। उन्नीस से पच्चीस जून तक दोनों राज्यों के विभिन्न हिस्सों में वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में इक्कीस से तेइस जून के बीच तेज हवाओं, बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसूनी प्रणाली के धीरे-धीरे मजबूत होने के कारण इन क्षेत्रों में वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे किसानों और जल स्रोतों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
पहाड़ी राज्यों में लगातार सक्रिय है वर्षा प्रणाली
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लगातार वर्षा का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड में उन्नीस से इक्कीस जून तक साठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने जैसी स्थितियों को देखते हुए प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। वहीं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में भी बीस जून के आसपास हल्की वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे तापमान में और गिरावट आ सकती है।
पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
मानसून की सक्रियता का सबसे अधिक प्रभाव पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल, विशेष रूप से कोलकाता और हावड़ा सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। सिक्किम तथा पूर्वोत्तर राज्यों में भी लगातार वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि अधिक वर्षा के कारण जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
मानसून की दस्तक से बदलेगा देश का मौसम परिदृश्य
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून और अधिक सक्रिय होगा, जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ेंगी। प्री-मानसून से मानसून की ओर बढ़ते इस संक्रमण काल में तेज हवाएं, गरज-चमक और अचानक होने वाली वर्षा सामान्य मौसम घटनाएं होंगी। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यह वर्षा कृषि, जल संरक्षण और तापमान नियंत्रण के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में इससे अस्थायी चुनौतियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।