सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों की योग्यता जांचने की प्रक्रिया लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने तेज कर दी है। हालांकि पुराने शिक्षकों को नए अभ्यर्थियों के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) नहीं देनी होगी। उनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित की जाएगी। वहीं, व्यापमं के जरिए वर्ष 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों को लेकर विभाग असमंजस में है। समाधान नहीं मिलने पर विधि विशेषज्ञों से कानूनी राय ली जा रही है।
परीक्षा कार्यक्रम जारी, जुलाई-अगस्त में नए अभ्यर्थियों के लिए होगा एग्जाम
सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के बाद डीपीआई ने शिक्षक पात्रता परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया था। इसके तहत जुलाई-अगस्त में पहली परीक्षा प्रस्तावित की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस परीक्षा में केवल नए अभ्यर्थी शामिल होंगे। पुराने शिक्षकों को इसमें शामिल होने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके लिए विभाग अलग से परीक्षा आयोजित करने की तैयारी कर रहा है।
साल में दो बार होगी पात्रता परीक्षा
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) के माध्यम से वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाएगी। अगले तीन वर्षों में सभी शिक्षकों की पात्रता का आंकलन करने का लक्ष्य रखा गया है। परीक्षा से पहले ऑनलाइन अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षकों को तैयारी में मदद मिल सके। यदि कोई शिक्षक पहली बार में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे आगे भी अवसर मिलते रहेंगे।
2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को लेकर असमंजस
वर्ष 2005 से 2009 के बीच व्यापमं द्वारा तीनों वर्गों के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। इन्हीं परीक्षाओं में प्राप्त अंकों और बोनस अंकों के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। ऐसे में विभाग के सामने सवाल खड़ा हो गया है कि पहले ही पात्रता परीक्षा दे चुके शिक्षकों से दोबारा टीईटी कराना कितना उचित होगा। इस संबंध में विधि विशेषज्ञों से राय मांगी गई है। उनकी सलाह मिलने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।