दिल्ली | केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने कामकाज और पुराने रिकॉर्ड की अनदेखी करती है। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने चुनाव आयोग को देशहित और जनहित में स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी है।
NDA सरकार में चुनाव आयोग को स्वायत्तता देने का दावा
पीयूष गोयल ने कहा कि NDA सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र तरीके से काम करने का अवसर दिया है। उनके मुताबिक, सरकार ने चुनाव आयुक्तों को ईमानदारी से अपने दायित्व निभाने दिए और किसी भी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक लाभ पहुंचाने का प्रयास नहीं किया। केंद्रीय मंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों को लेकर सरकार के रुख का बचाव करते हुए कहा कि आयोग को कानूनी प्रावधानों के तहत काम करने की स्वतंत्रता दी गई है।
राहुल गांधी और कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड पर उठाए सवाल
गोयल ने कांग्रेस और राहुल गांधी के पुराने रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते समय अपने अतीत को नजरअंदाज करती है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में मुख्य चुनाव आयुक्तों (CEC) से जुड़े कुछ लोगों को राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर नियुक्त किया गया था। केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को टिकट दिए जाने, एक को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने और दो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल नियुक्त किए जाने का उल्लेख किया। इन दावों के संदर्भ में संबंधित व्यक्तियों के नाम और नियुक्तियों के विवरण की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर देश में राजनीतिक बहस समय-समय पर तेज होती रही है। सत्ता पक्ष जहां आयोग की स्वायत्तता और मौजूदा व्यवस्था का बचाव करता है, वहीं विपक्ष नियुक्तियों और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाता रहा है। पीयूष गोयल का यह बयान इसी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। उनके आरोपों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और उनके द्वारा बताए गए पुराने मामलों का तथ्यात्मक विवरण सामने आने के बाद इस मुद्दे पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।