नई दिल्ली | वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उप निर्वाचन आयुक्तों के नेतृत्व में आयोग के वरिष्ठ अधिकारी चुनाव वाले राज्यों में व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। आयोग की एक टीम फिलहाल उत्तराखंड के दौरे पर है, जबकि आने वाले दिनों में मणिपुर और पंजाब का दौरा प्रस्तावित है। गोवा दौरे की तारीखों में बदलाव किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के दौरे को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी
निर्वाचन आयोग आगामी विधानसभा चुनावों के लिए प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। जिन पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड शामिल हैं। आयोग के वरिष्ठ अधिकारी इन राज्यों में चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं का आकलन कर रहे हैं, ताकि मतदान की प्रक्रिया समय पर और सुचारु रूप से पूरी कराई जा सके। आमतौर पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों वाली पूर्ण आयोग की टीम संबंधित राज्यों का दौरा करती है। इन दौरों के दौरान चुनाव तैयारियों, प्रशासनिक व्यवस्था और मतदान से जुड़ी आवश्यकताओं की समीक्षा की जाती है।
उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर चुनाव अहम
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आगामी चुनाव को लेकर राज्य की तैयारियां महत्वपूर्ण रहेंगी। हालांकि, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के उत्तर प्रदेश दौरे की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर भी चुनाव होने हैं। इन चारों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा।
UP और गोवा में EVM-VVPAT की जांच शुरू
चुनावी तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश और गोवा में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) तथा वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनों की प्रथम स्तर की जांच यानी फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) शुरू कर दी गई है। यह प्रक्रिया मतदान में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की तकनीकी स्थिति और कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है। इस जांच के दौरान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के इंजीनियर मशीनों की तकनीकी जांच करते हैं। जिन मशीनों में खराबी मिलती है, उन्हें मरम्मत या बदलने के लिए संबंधित निर्माता कंपनियों के पास भेजा जाता है।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में होता है मॉक पोल
EVM और VVPAT की जांच के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक पोल भी कराया जाता है। इसका उद्देश्य मशीनों के कामकाज की जांच करना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया के लिए एक निर्धारित कैलेंडर जारी करता है, जिसका राज्यों को पालन करना होता है। FLC के दौरान कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट में पिछले चुनावों से संबंधित डेटा मिटाया जाता है। सभी जांचों में सफल मशीनों पर ‘FLC OK’ का निशान लगाया जाता है और अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए विशेष गुलाबी कागजी सील लगाई जाती है।
चुनाव से पहले तकनीकी तैयारियों का अहम चरण
एक EVM व्यवस्था में कम से कम एक बैलेट यूनिट, एक कंट्रोल यूनिट और एक VVPAT मशीन शामिल होती है। इन मशीनों की जांच चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मतदान के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आयोग के राज्यवार दौरे और मशीनों की जांच की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हालांकि, चुनाव की तारीखों और कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा ही की जाएगी।