नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उनका कोई तय डाइट सिस्टम नहीं रहा। जीवन के अलग-अलग पड़ावों में उन्हें अलग-अलग परिवारों के साथ रहने का अवसर मिला और वहां जो भोजन मिलता था वही खाते थे। उन्होंने साफ कहा कि वे शाकाहारी हैं और सिर्फ वेज खाते हैं। भोजन को लेकर अत्यधिक नियमों में बंधने के बजाय अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार खानपान अपनाने की सलाह दी। सादगी भरी जीवनशैली को उन्होंने फिटनेस का आधार बताया।
जो मिला वही खाया
पीएम मोदी ने बताया कि पहले जब वे अलग-अलग परिवारों में रहते थे तब वहां जो खाना बनता था वही खा लेते थे। कई बार खुद खाना बनाना पड़ता था। ऐसे समय में वे सिंपल और हल्का भोजन जैसे खिचड़ी बनाकर खाते थे। उनका जोर इस बात पर रहा कि भोजन को दवा की तरह नहीं खाना चाहिए। डाइट तभी सफल होती है जब वह जीवनशैली का हिस्सा बने। मजबूरी या दबाव में खाया गया भोजन लंबे समय तक नहीं निभाया जा सकता और उसका आनंद भी खत्म हो जाता है। पसंद का भोजन ही टिकाऊ साबित होता है।
पेट भरकर नहीं मन भरकर खाएं
प्रधानमंत्री ने खाने की आदतों पर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को तय करना चाहिए कि उसे पेट भरकर खाना है या मन भरकर। ज्यादातर लोग तब तक खाते रहते हैं जब तक कोई उन्हें रोक न दे। अनाज तो पेट भरकर खा लेते हैं लेकिन शरीर की दूसरी जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। संतुलित और जरूरत के अनुसार भोजन करने पर जोर दिया। अधिक खाने से बचने और शरीर की वास्तविक मांग को समझने की सलाह दी। सही मात्रा में भोजन फिटनेस बनाए रखने में मददगार होता है।
भोजन जितना जरूरी उतनी ही सांस
पीएम मोदी ने कहा कि लोग खाने पर तो ध्यान देते हैं लेकिन सही तरीके से सांस लेने पर नहीं। उनका मानना है कि दिन में जब भी अवसर मिले गहरी सांस लेनी चाहिए। पूरी क्षमता से सांस लें कुछ पल रोकें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें। यह अभ्यास शरीर और मन दोनों को ऊर्जा देता है। सांस को भोजन जितना ही महत्वपूर्ण बताया। नियमित गहरी सांस लेने से थकान कम होती है और ऊर्जा बनी रहती है। व्यस्त दिनचर्या में भी इस अभ्यास को शामिल करने की सलाह दी।
शरीर को प्राथमिकता दें
प्रधानमंत्री का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने शरीर को सबसे आखिर में रखते हैं। काम जिम्मेदारियों और तनाव के बीच स्वास्थ्य पीछे छूट जाता है। उनके अनुसार अगर व्यक्ति स्वस्थ रहेगा तभी बाकी सभी दायित्वों को बेहतर तरीके से निभा पाएगा। 76 वर्ष की आयु में भी लगातार सक्रिय रहने का राज शरीर को प्राथमिकता देने में छिपा है। नियमित दिनचर्या सादगी भरा भोजन और सांस पर ध्यान देने से फिटनेस बनी रहती है। पीएम मोदी की जीवनशैली कई लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।