पीएम मोदी 3 जनवरी को सुबह लगभग 11 बजे नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इस प्रदर्शनी का शीर्षक ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन’ है। यह प्रदर्शनी पहली बार उन पिपरहवा अवशेषों को एक साथ प्रस्तुत कर रही है, जिन्हें एक सदी से भी अधिक समय बाद स्वदेश वापस लाया गया है। इसके साथ ही पिपरहवा से प्राप्त प्रामाणिक अवशेषों और पुरातात्विक सामग्रियों को भी यहां प्रदर्शित किया गया है, जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में सुरक्षित हैं।
पिपरहवा अवशेष की खोज
1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे पुराने और ऐतिहासिक रूप से अहम अवशेषों में शामिल हैं। पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसे वह स्थान माना जाता है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन बिताया था।
भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का प्रदर्शन
यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के गहरे और निरंतर सभ्यतागत संबंध को दर्शाती है। साथ ही यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को भी दिखाती है। इन अवशेषों को हाल ही में स्वदेश वापस लाना सरकार के लगातार प्रयासों, संस्थानों के सहयोग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से संभव हो पाया है।
सांची स्तूप से प्रेरित केंद्रीय मॉडल
प्रदर्शनी को अलग-अलग विषयों के आधार पर सजाया गया है। इसके केंद्र में सांची स्तूप से प्रेरित एक पुनर्निर्मित मॉडल रखा गया है, जिसमें राष्ट्रीय संग्रहों के प्रामाणिक अवशेष और स्वदेश वापस लाए गए रत्न एक साथ प्रदर्शित किए गए हैं। अन्य खंडों में पिपरहवा रिविजिटेड, बुद्ध के जीवन की झलकियां, मूर्त में अमूर्त: बौद्ध शिक्षाओं की कलात्मक भाषा, सीमाओं के पार बौद्ध कला और विचारों का विस्तार तथा सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी: निरंतर प्रयास शामिल हैं।
ऑडियो-विजुअल व्यवस्था से अनुभव बढ़ाया
आम लोगों की समझ बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी में ऑडियो-विजुअल व्यवस्था भी की गई है। इसमें इमर्सिव फिल्में, डिजिटल पुनर्निर्माण, व्याख्यात्मक प्रोजेक्शन और मल्टीमीडिया प्रस्तुतियां शामिल हैं। इसके जरिए भगवान बुद्ध के जीवन, पिपरहवा अवशेषों की खोज, उनके संदेशों के प्रसार और उनसे जुड़ी कला परंपराओं की सरल और गहन जानकारी दी गई है।
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