ओस्लो/नई दिल्ली: भारतीय शतरंज के 'वंडर बॉय' और युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंदा ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। नॉर्वे चेस 2026 (Norway Chess 2026) टूर्नामेंट में मंगलवार को प्रज्ञानंदा ने वह कर दिखाया जो शतरंज के इतिहास में आज तक कोई खिलाड़ी नहीं कर सका था। प्रज्ञा ने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी और आठ बार के चैंपियन मैग्नस कार्लसन को उन्हीं की सरजमीं पर दूसरी बार शिकस्त देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ प्रज्ञानंदा क्लासिकल चेस के एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को हराने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। यही नहीं, वह दुनिया के पहले ऐसे शतरंज खिलाड़ी भी बन गए हैं जिन्होंने एक ही कैलेंडर वर्ष में क्लासिकल चेस के भीतर विश्व के नंबर एक खिलाड़ी को दो बार धूल चटाई है।
निराशा के साथ कार्लसन ने मानी हार, दांव पर लगी बादशाहत
मुकाबले के दौरान प्रज्ञानंदा की चालों के सामने दिग्गज मैग्नस कार्लसन बिल्कुल बेबस नजर आए। अपनी हार को भांपते हुए कार्लसन ने बेहद खेल भावना के साथ प्रज्ञा से हाथ मिलाया और चेहरे पर साफ दिख रही निराशा के साथ टेबल छोड़ दी। वर्ल्ड नंबर-1 पर भारतीय ग्रैंडमास्टर की इस बादशाहत ने कार्लसन के नौवें नॉर्वे चेस खिताब जीतने के सपने को तगड़ा झटका दिया है। क्लासिकल चेस में यह कार्लसन की लगातार चौथी हार है, जिसमें से दो हार उन्हें अकेले प्रज्ञानंदा ने दी हैं।
इस धमाकेदार जीत के साथ प्रज्ञानंदा कुल 20 अंकों के साथ अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। टूर्नामेंट में अब केवल दो राउंड का खेल बाकी है और कार्लसन का भाग्य अब पूरी तरह से अधर में लटक गया है।
चैंपियन बनने का मौका, रेस से बाहर हुए गुकेश
नॉर्वे चेस टूर्नामेंट की मौजूदा स्थिति की बात करें तो अमेरिका के ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो इस समय शीर्ष (पहले) स्थान पर काबिज हैं, जबकि फ्रांस के अलीरेज़ा फिरोज़ा दूसरे नंबर पर चल रहे हैं। तीसरे नंबर पर मौजूद प्रज्ञानंदा के पास चैंपियन बनने का सुनहरा मौका है। अगर वह अगले दो राउंड के मुकाबले जीतने में कामयाब रहते हैं, तो वह इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाले पहले भारतीय बन सकते हैं।
दूसरी ओर, टूर्नामेंट में भारत को एक बड़ा झटका भी लगा है। हाल ही में शानदार फॉर्म में रहे भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश इस खिताबी दौड़ से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। लगातार तीन मुकाबले हारने के कारण गुकेश मात्र 8 अंकों पर ही सिमट कर रह गए हैं। अब वह बचे हुए मैचों में अधिकतम 14 अंकों तक ही पहुंच सकते हैं, जो उन्हें रेस में वापस लाने के लिए काफी नहीं है। अब देश की सभी उम्मीदें प्रज्ञानंदा पर टिकी हैं।