नई दिल्ली: खदानों के कोयले से लेकर संसद के भीतर जटिल समीकरणों को सुलझाने का लंबा अनुभव रखने वाले प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) के कंधों पर अब देश के करोड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य की कमान सौंपी गई है। नीट विवाद और छात्रों के उग्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार शाम प्रह्लाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री घोषित किया है।अन्य मंत्रालयों की तुलना में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं मानी जाती। छात्र आंदोलन के बीच नई कमान संभालने के बाद अब हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नए शिक्षा मंत्री की खुद की शैक्षणिक योग्यता क्या है और वे इस बड़े संकट से देश को कैसे उबारेंगे।
मानविकी (Arts) के छात्र रहे हैं प्रह्लाद जोशी:
हाल के दिनों में देश के शिक्षा मंत्रियों के पास इंजीनियरिंग, कानून या मैनेजमेंट जैसी पेशेवर डिग्रियां रही हैं, लेकिन प्रह्लाद जोशी इस मामले में थोड़े अलग हैं।
प्रारंभिक शिक्षा और स्नातक: 27 नवंबर 1962 को जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक के हुबली से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद वर्ष 1983 में उन्होंने धारवाड़ स्थित कर्नाटका विश्वविद्यालय से संबद्ध 'कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज' से कला संकाय (B.A.) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
पूर्व शिक्षा मंत्री की योग्यता: वहीं, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के तालचेर कॉलेज से पढ़ाई के बाद भुवनेश्वर के उत्कल विश्वविद्यालय से एंथ्रोपोलॉजी (Anthropology) में एम.ए. किया था।
2 दशक का बेदाग राजनीतिक सफर:
कर्नाटक के कद्दावर नेताओं में शुमार प्रह्लाद जोशी राजनीति में आने से पहले छोटे व्यवसाय और समाज सेवा से जुड़े थे।लगातार 5 बार सांसद: वर्ष 2004 में वे धारवाड़ लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद 2004 से 2024 तक लगातार 5 बार चुनाव जीतकर उन्होंने धारवाड़ में अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
संगठन और सरकार में भूमिका: 2013 से 2016 तक वे कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष रहे। 2019 में मोदी सरकार में शामिल होने के बाद उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और हाल ही में उपभोक्ता मामले, खाद्य वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कामकाज संभाला। धारा 370 हटाने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित कराने में उनकी संसदीय कार्यप्रणाली की अहम भूमिका रही।

नए शिक्षा मंत्री के सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां:
प्रह्लाद जोशी ऐसे समय में पदभार ग्रहण कर रहे हैं जब देश की शिक्षा प्रणाली एक कठिन दौर से गुजर रही है।
- NTA पर भरोसा बहाल करना: नीट (NEET) परीक्षा विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख को भारी धक्का लगा है। छात्रों और अभिभावकों का विश्वास दोबारा कायम करना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।
- आंदोलनकारी छात्रों की उम्मीदें: सीजेपी (CJP) के 36 दिनों के आंदोलन के बाद छात्रों की मांगों को स्वीकार किया गया है। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ ने कहा, "नए शिक्षा मंत्री समझ चुके हैं कि देश का युवा अपने अधिकारों के लिए सवाल पूछेगा और जवाब मांगेगा।"
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का क्रियान्वयन: देश भर में नई शिक्षा नीति को पारदर्शी और सुचारू तरीके से लागू करना और स्कूलों-कॉलेजों के स्तर में सुधार करना बड़ी चुनौती होगी।
निजी जीवन और संपत्ति:
प्रह्लाद जोशी का विवाह 1992 में ज्योति जोशी से हुआ था। उनकी तीन बेटियां हैं—अर्पिता, अनुषा और अनन्या। 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, जोशी परिवार की कुल चल-अचल संपत्ति लगभग 21 करोड़ रुपये है।कठिन से कठिन मंत्रालयों में सुधार की अपनी क्षमता के लिए जाने जाने वाले 5 बार के इस सांसद का असली 'रिपोर्ट कार्ड' अब देश के युवाओं के भरोसे और शिक्षा प्रणाली के भविष्य से तय होगा।