नई दिल्ली. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को IDBI बैंक के कर्मचारियों के नाम लिखे एक पत्र को एक्स पर साझा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं। कांग्रेस नेता ने बैंक की प्रस्तावित बिक्री का विरोध करते हुए सरकार पर हमला बोला। पत्र में उन्होंने कर्मचारियों के हितों और जमाकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने अपना रुख सार्वजनिक किया। विपक्षी नेता का यह कदम बैंक कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। समर्थन जताकर उन्होंने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
सार्वजनिक बैंकों की बिक्री पर आपत्ति
राहुल गांधी ने कहा कि सार्वजनिक धन से बने संस्थान जनता के हैं और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेचा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे बैंकों को निजी हाथों में सौंपना सही नहीं। लाभ कमाने वाले बैंक को बेचने के फैसले पर सवाल उठाया गया। कांग्रेस नेता के अनुसार ये संस्थान देश के औद्योगिक विकास के लिए बनाए गए थे। निजीकरण की प्रक्रिया को जनता के हितों के खिलाफ बताया गया। सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को मजबूत बनाए रखने की वकालत की गई। पूरे मुद्दे को वैचारिक रूप से पेश किया गया।
कर्मचारियों से मुलाकात का जिक्र
गांधी ने पत्र में बताया कि पिछले साल मार्च में IDBI बैंक के कर्मचारियों के एक समूह ने संसद भवन में उनसे मुलाकात की थी। कर्मचारियों ने सवाल किया था कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है जिसे उन्होंने मुनाफे में पहुंचाया है। मुलाकात के दौरान कर्मचारियों की चिंताओं को सुना गया। राहुल गांधी ने इस मुलाकात का हवाला देते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कर्मचारियों के प्रयासों को रेखांकित किया गया। व्यक्तिगत संवाद को आधार बनाकर राजनीतिक हमला किया गया। मुलाकात की याद से मुद्दे को मानवीय रूप दिया गया।
लोकसभा में उठाया गया मुद्दा
कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा लोकसभा में उठाया और सरकार से पूछा कि एक लाभ कमाने वाले सार्वजनिक बैंक को क्यों बेचा जा रहा है। कर्मचारियों एवं जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी यह भी पूछा गया। सरकार ने इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया। संसद में उठाए गए सवालों के जवाब न मिलने पर असंतोष जताया गया। विपक्ष ने संसदीय प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए दबाव बनाने की कोशिश की। लोकसभा की चर्चा को पत्र में शामिल कर पारदर्शिता की मांग की गई। संसदीय जवाबदेही का मुद्दा भी जोड़ा गया।
फेयरफैक्स को बिक्री का आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि सरकार ने अब IDBI बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है। विदेशी कंपनी को बैंक सौंपने पर आपत्ति जताई गई। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान को विदेशियों के हाथ में देने का आरोप लगाया गया। बिक्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए। विपक्ष ने इसे आर्थिक राष्ट्रवाद के खिलाफ बताया। फेयरफैक्स डील को लेकर राजनीतिक हमला तेज किया गया। निजीकरण के विदेशी आयाम को रेखांकित किया गया।
कांग्रेस और भाजपा का तुलनात्मक आरोप
पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के समय में IDBI बना देश का उद्योग खड़ा करने के लिए। मोदी के समय में पहले बोली देखी गई फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के समय बैंक बनते थे मोदी के समय में बिकते हैं। ऐतिहासिक तुलना करते हुए दो सरकारों की नीतियों में अंतर दिखाया गया। निर्माण बनाम बिक्री का नैरेटिव पेश किया गया। राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए इस भाषा का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष ने अपनी विरासत को बचाते हुए सत्तापक्ष पर हमला बोला।