कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी जल्द ही अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। उन्होंने कहा कि अब जब राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो चुका है और ध्वजारोहण सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न हो गए हैं, ऐसे में राहुल गांधी का रामलला के दर्शन करना पूरी तरह स्वाभाविक और श्रद्धा से जुड़ा विषय है।
मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद बदला रुख
तनुज पुनिया ने राहुल गांधी के अब तक राम मंदिर न जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मंदिर निर्माणाधीन था, तब वहां पूजा-अर्चना करना परंपराओं के अनुरूप नहीं था। अब मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है और धार्मिक विधियां संपन्न हो चुकी हैं, इसलिए राहुल गांधी का दर्शन करने का निर्णय स्वाभाविक रूप से लिया गया है।
संसदीय समिति के दौरे से जुड़ा कार्यक्रम
दरअसल, 23 जनवरी को 32 सदस्यीय संसदीय समिति अयोध्या के दौरे पर आ रही है, जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हैं। इसी दौरान उनके रामलला दर्शन की संभावना जताई जा रही है। समिति के इस दौरे को लेकर न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि धार्मिक संगठनों और संत समाज में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
2016 का अयोध्या दौरा और राम मंदिर संदर्भ
गौरतलब है कि राहुल गांधी इससे पहले वर्ष 2016 में अयोध्या आए थे। उस समय उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन कर संतों से आशीर्वाद लिया था, लेकिन राम मंदिर निर्माणाधीन होने के कारण रामलला के दर्शन नहीं किए थे। बाद में राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण भी भेजा गया था, जिसे लेकर भी चर्चाएं हुई थीं।
संत समाज की मिली-जुली प्रतिक्रियाए
राहुल गांधी के संभावित अयोध्या दौरे पर संत समाज की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग सामने आ रही हैं। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि भगवान श्रीराम की शरण में आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है। हालांकि उन्होंने राहुल गांधी से सनातन धर्म पर विवादित बयान देने वाले सहयोगी दलों को लेकर सवाल भी उठाए और इस विषय पर स्पष्टता की अपेक्षा जताई।
राम जी की शरण में आने पर कोई रोक नहीं
वहीं जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी के रामलला दर्शन का स्वागत करते हुए कहा कि राम जी की शरण में आने से किसी को भी रोका नहीं जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस दौरे के पीछे राजनीतिक उद्देश्य भी हो सकता है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
धार्मिक आस्था और राजनीति का संगम
विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी का अयोध्या दौरा धार्मिक आस्था और राजनीतिक रणनीति, दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह दौरा कांग्रेस की छवि, संत समाज की प्रतिक्रिया और राजनीतिक विमर्श पर किस तरह असर डालेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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