कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तमिल लोगों की आवाज दबाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने अभिनेता से नेता बने विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को रोकने की कोशिश की और इसे तमिल संस्कृति पर हमला बताया। गांधी के अनुसार यह कदम तमिल समाज की अभिव्यक्ति पर प्रहार है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भाजपा का कड़ा जवाब और बयान की आलोचना
राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इसे वास्तविकता से कोसों दूर बताया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस सांसद का बयान ‘‘बेहद शर्मनाक और दुखद’’ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के आरोप तथ्यहीन हैं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास मात्र हैं।
अलगाववाद के आरोप और राजनीतिक तीखापन
भाजपा ने राहुल गांधी को भारतीय राजनीति में अलगाववाद का एक ‘‘सटीक उदाहरण’’ बताया। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी बार-बार क्षेत्र, भाषा और जाति के नाम पर समाज को बांटने वाली राजनीति करते रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने उनसे ऐसी टिप्पणियों से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि इस प्रकार की राजनीति देश की एकता और अखंडता के लिए नुकसानदेह है।
तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति मोदी सरकार का रुख
भाजपा ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 11 वर्षों में तमिल भाषा, संस्कृति और विरासत के प्रति अभूतपूर्व सम्मान दिखाया है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर तमिल पहचान को मजबूती से रखा है। हाल ही में ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा उत्तर भारत के छात्रों से तमिल भाषा सीखने की अपील को भी सांस्कृतिक समन्वय का उदाहरण बताया गया।
राष्ट्र-विरोधी मानसिकता और विभाजनकारी राजनीति का आरोप
भाजपा ने आरोप लगाया कि कुछ नेता अलगाववादी प्रवृत्ति और राष्ट्र-विरोधी मानसिकता के साथ क्षेत्र, भाषा और जाति का इस्तेमाल कर राजनीतिक तांडव मचाने में लगे हैं। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी का पिछला रिकॉर्ड उनकी इसी तरह की असंवेदनशील और विभाजनकारी राजनीति को उजागर करता है।
लोकतांत्रिक जिम्मेदारी और बयानबाज़ी की सीमा
भाजपा ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं से संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। पार्टी के अनुसार इस तरह के बयान लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करते हैं और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करते हैं।
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