नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और अधिकारों को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा का भी जिक्र किया। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी पर तंज कसते हुए लिखा कि प्रियंका गांधी उनसे ज्यादा समझदार हैं और उन्हें अपनी जगह दे देनी चाहिए। बीजेपी सांसद का यह बयान राहुल गांधी के पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं को लेकर दिए गए वक्तव्य के बाद सामने आया। राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को देश की शक्ति बताते हुए उनकी स्वतंत्र पहचान और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की बात कही थी। इसी बयान को लेकर निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर राजनीतिक हमला बोला।
राहुल गांधी ने महिलाओं को लेकर क्या कहा था?
पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की भूमिका और उनके अधिकारों पर बात की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की अपनी पहचान और अस्तित्व है और उनकी पहचान को पिता, पति या बेटे के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने महिलाओं को भारत की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि देश की महिलाओं की अपनी यात्राएं, कल्पनाएं और सपने हैं। उन्होंने महिलाओं से अपनी बात खुलकर रखने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का भी उल्लेख किया। उन्होंने उस विचार की आलोचना की, जिसके अनुसार महिला को जीवन के अलग-अलग चरणों में पिता, पति या बेटे के अधीन रहने की बात कही गई है। राहुल गांधी ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए।
निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी का नाम लेकर साधा निशाना
राहुल गांधी के इसी बयान पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रियंका गांधी राहुल गांधी से ज्यादा समझदार हैं और उन्हें अपनी 'गद्दी' दे देनी चाहिए। बीजेपी सांसद के इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व और गांधी परिवार को लेकर उनके राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है। निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में परिवार और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सिद्धांत और उपदेश अपने घर से नहीं, बल्कि दूसरों पर लागू करने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
नेहरू और कांग्रेस अध्यक्ष पद का किया जिक्र
निशिकांत दुबे ने अपने बयान में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने अपने जीवनकाल में कांग्रेस अध्यक्ष के पद के लिए अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को आगे नहीं किया, बल्कि इंदिरा गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया। बीजेपी सांसद ने 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव का जिक्र करते हुए सरोजिनी नायडू के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास को सामने रखते हुए राहुल गांधी के मौजूदा बयान पर सवाल खड़े करने की कोशिश की। हालांकि, उनके सोशल मीडिया पोस्ट का मुख्य निशाना राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता को लेकर दिया गया बयान ही रहा।
फिरोज गांधी और इंदिरा गांधी के चुनाव का भी उल्लेख
निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में फिरोज गांधी और इंदिरा गांधी के बीच संसदीय चुनाव को लेकर हुए कथित राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने 1957 के चुनाव का संदर्भ देते हुए गांधी परिवार और राजनीतिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए। इसी क्रम में उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे'। यानी बीजेपी सांसद का आरोप यह था कि कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से दूसरों को सिद्धांतों की सीख देने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास को भी देखना चाहिए।
महिलाओं को लेकर राहुल गांधी ने रखी अपनी बात
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल किसी परिवार की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी अलग पहचान और आकांक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी करोड़ों महिलाओं की अलग-अलग यात्राओं, कल्पनाओं और सपनों में है। राहुल गांधी ने महिलाओं से खुलकर बोलने, अपनी पहचान पर गर्व करने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। उनके इस बयान का उद्देश्य महिलाओं की स्वतंत्रता और समान अधिकारों के मुद्दे को सामने रखना था। लेकिन इसके बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इसे राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा।
मनुस्मृति के संदर्भ को लेकर भी हुई राजनीतिक बहस
राहुल गांधी ने अपने भाषण में मनुस्मृति के एक कथित प्रावधान का उल्लेख किया, जिसमें महिला के जीवन के अलग-अलग चरणों में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहने की बात कही जाती है। उन्होंने इस विचार की आलोचना करते हुए इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। राहुल गांधी के मुताबिक, महिलाओं को अपने जीवन और फैसलों के लिए स्वतंत्र पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसी हिस्से को लेकर बीजेपी की ओर से निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधा।
बयान के बाद बढ़ी सियासी बयानबाजी
राहुल गांधी और निशिकांत दुबे के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब संसद और सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं के अधिकार, सामाजिक समानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर लगातार बहस होती रही है। राहुल गांधी ने अपने कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकार और स्वतंत्रता को केंद्र में रखा, जबकि निशिकांत दुबे ने उनके बयान का जवाब देते हुए कांग्रेस और गांधी परिवार के राजनीतिक इतिहास को निशाने पर लिया। इस तरह एक सामाजिक मुद्दे पर दिया गया राहुल गांधी का बयान राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया है।
निशिकांत दुबे के बयान का राजनीतिक संदेश क्या?
निशिकांत दुबे के बयान को केवल राहुल गांधी पर व्यक्तिगत तंज के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसमें कांग्रेस के नेतृत्व और गांधी परिवार की राजनीति को लेकर बीजेपी की पुरानी आलोचना भी दिखाई देती है। प्रियंका गांधी का नाम लेकर निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर भी तंज किया। वहीं नेहरू, इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी के पुराने राजनीतिक प्रसंगों का जिक्र करके उन्होंने राहुल गांधी के बयान को उनके परिवार के राजनीतिक इतिहास से जोड़ने की कोशिश की। दूसरी ओर, राहुल गांधी का मूल बयान महिलाओं की स्वतंत्र पहचान, समानता और अधिकारों पर केंद्रित था।