नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' भारत की आधुनिक सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और तकनीक आधारित युद्ध कौशल का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों के कारण भारत आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि देश का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
'ऑपरेशन सिंदूर' ने दिखाई भारत की ताकत
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य और आधुनिक रक्षा तैयारियों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने साबित कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम करता है और जरूरत पड़ने पर आतंकवाद के स्रोत तक पहुंचकर कार्रवाई करने की क्षमता रखता है।
स्वदेशी हथियारों का हुआ प्रभावी इस्तेमाल
राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश तीर, आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस सहित कई स्वदेशी और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यह पिछले 12 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
रक्षा मंत्री के अनुसार:
वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन बढ़कर लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
2014 के आसपास यह आंकड़ा करीब 40 हजार करोड़ रुपये था।
रक्षा निर्यात बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में यह केवल 686 करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इस वर्ष रक्षा उत्पादन को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। वहीं, रक्षा निर्यात को 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जल्द आएगी नई स्वदेशीकरण सूची
राजनाथ सिंह ने बताया कि अब तक सशस्त्र बलों के लिए 509 वस्तुओं और रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) के लिए 5,012 वस्तुओं की सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को और मजबूती देने के लिए जल्द ही नई सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची भी जारी की जाएगी।
स्टार्टअप और MSME की अहम भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान, विकास और नवाचार के बिना आत्मनिर्भरता संभव नहीं है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप, MSME और युवा नवाचारकर्ताओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार उन्हें हरसंभव प्रोत्साहन दे रही है।
रक्षा औद्योगिक गलियारों का भी किया जिक्र
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बनाए गए रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) देश में उन्नत रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। कई भारतीय कंपनियां अब वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन चुकी हैं।