मुम्बई. भारत में नकली नोटों की तस्करी लंबे समय से आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती रही है। पड़ोसी देशों के रास्ते फर्जी भारतीय मुद्रा की तस्करी की आशंकाओं को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को अपनी नकदी प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत करने का निर्देश दिया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि कुछ बैंक नकली नोटों की पहचान और रिपोर्टिंग को लेकर अपेक्षित स्तर की तैयारी नहीं कर पाए हैं। ऐसे में अब सभी बैंकों को अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर उन्हें अधिक प्रभावी बनाना होगा।
सीमावर्ती जिलों में नोट जांच मशीनें होंगी अनिवार्य
RBI ने स्पष्ट किया है कि जिन जिलों की सीमा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगती है, वहां स्थित सभी बैंक शाखाओं में नोट सत्यापन (Note Authentication) मशीनें उपलब्ध होनी चाहिए। इन मशीनों के माध्यम से बैंक में आने वाले प्रत्येक नोट की जांच की जाएगी, जिससे नकली नोटों की पहचान तुरंत हो सके और उन्हें आगे प्रचलन में जाने से रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की व्यवस्था लागू होने से फर्जी मुद्रा के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा और बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
नकली नोट मिलने पर क्या होगा?
RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी बैंक शाखा में नकली नोट मिलता है, तो उसे तत्काल जब्त किया जाएगा। ऐसे नोट किसी भी परिस्थिति में ग्राहक को वापस नहीं किए जाएंगे और न ही बैंक स्तर पर उन्हें नष्ट किया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देना और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना बैंक की जिम्मेदारी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य नकली नोटों के स्रोत तक पहुंचना और उनके नेटवर्क की पहचान करना है, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियां प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
बैंक कर्मचारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि नकदी संभालने वाले कर्मचारियों को असली भारतीय नोटों की सुरक्षा विशेषताओं की नियमित ट्रेनिंग दी जाए। कर्मचारियों को वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, माइक्रो लेटरिंग, कलर-शिफ्टिंग इंक और अन्य सुरक्षा संकेतकों की पहचान में दक्ष बनाया जाएगा।
RBI का मानना है कि प्रशिक्षित कर्मचारी मशीनों के साथ मिलकर नकली नोटों की पहचान को और अधिक सटीक बना सकते हैं।
सभी नकदी की मशीन से होगी जांच
नए निर्देशों के तहत बैंकों में जमा होने वाली नकदी की जांच मशीनों के जरिए करना अनिवार्य होगा। इससे मानव त्रुटि की संभावना कम होगी और नकली नोटों की पहचान अधिक विश्वसनीय तरीके से हो सकेगी। RBI ने यह भी कहा है कि सभी बैंकों को अपनी मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने चाहिए ताकि नकली भारतीय मुद्रा नोट (FICN) की पहचान, जब्ती और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी बन सके।
नकली नोटों पर क्यों बढ़ी सख्ती?
हाल के वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों ने कई मामलों में सीमावर्ती इलाकों के जरिए नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी के प्रयासों का खुलासा किया है। ऐसे मामलों को देखते हुए RBI लगातार बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दे रहा है। नकली नोट केवल आम लोगों को आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि देश की वित्तीय स्थिरता, बैंकिंग व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
RBI का यह कदम नकली मुद्रा के खिलाफ व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और सख्त रिपोर्टिंग व्यवस्था के जरिए फर्जी नोटों के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।