सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शंकर घोष एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत कर भाजपा के प्रमुख नेताओं में अपनी पहचान बनाई है। 2021 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में और भी बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। वर्तमान में वे पश्चिम बंगाल विधानसभा के मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत
12 जून 1974 को जन्मे शंकर घोष ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1991 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से की थी। इसके बाद 1995 में वे डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) से जुड़े। युवा राजनीति के दौरान उन्होंने विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2010 में वे दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 17वें वर्ल्ड फेस्टिवल ऑफ यूथ एंड स्टूडेंट्स में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी रहे।
नगर निगम की राजनीति में बढ़ा प्रभाव
साल 2015 में शंकर घोष सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 24 से पार्षद निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्हें मेयर-इन-काउंसिल (MMiC) के सदस्य के रूप में शिक्षा, खेल, संस्कृति और युवा मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में उन्हें स्वास्थ्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया। उन्होंने सिलीगुड़ी नगर निगम के बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स के सदस्य के रूप में भी कार्य किया, जिससे स्थानीय प्रशासन में उनका अनुभव और प्रभाव दोनों बढ़े।
भाजपा में शामिल होकर बदली राजनीतिक दिशा
12 मार्च 2021 को शंकर घोष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए। उसी वर्ष हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ओमप्रकाश मिश्रा को 35,586 वोटों के अंतर से हराकर पहली बार विधायक बने। भाजपा में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और वे उत्तर बंगाल में पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे।
2026 में रिकॉर्ड अंतर से दोबारा जीत
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शंकर घोष ने एक बार फिर सिलीगुड़ी सीट से जीत हासिल की। इस बार उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार गौतम देव को 73,192 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस शानदार जीत ने न केवल उनकी लोकप्रियता को साबित किया बल्कि भाजपा के उत्तर बंगाल में मजबूत जनाधार का भी संकेत दिया।
विधानसभा के मुख्य सचेतक बने
वर्ष 2024 में शंकर घोष को पश्चिम बंगाल विधानसभा का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया गया। इस जिम्मेदारी के तहत वे विधानसभा में पार्टी की रणनीति और विधायी गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
‘सरासरी शंकर’ कार्यक्रम से जनता तक सीधा संवाद
मई 2026 में शंकर घोष ने सिलीगुड़ी के बाघाजतिन पार्क में “सरासरी शंकर” नामक जनसंपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सिलीगुड़ी के अलावा मालदा, कूचबिहार और कोलकाता से भी लोग पहुंचे और अपनी समस्याएं, शिकायतें तथा सुझाव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान भूमि विवाद, भर्ती में कथित भ्रष्टाचार और विभिन्न नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। शंकर घोष ने आश्वासन दिया कि इन शिकायतों को मुख्यमंत्री और संबंधित सरकारी विभागों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही उन्होंने नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में भी ऐसे जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की।
राजनीतिक रूप से लगातार मजबूत हो रही पकड़
छात्र राजनीति से लेकर नगर निगम, विधानसभा और भाजपा संगठन तक शंकर घोष का सफर लगातार विस्तार लेता रहा है। 2026 की बड़ी जीत और जनता के बीच सक्रिय उपस्थिति ने उन्हें उत्तर बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल कर दिया है।